
उत्तरकाशी। बाजार की मांग के अनुसार फसलचक्र में बदलाव करके तैयार की गई अषाढ़ी फसल इस बार आपदा की भेंट चढ़ गई। आलू के खेतों में मटर, राजमा, कुट्टू तथा तिलहनी फसलों से भी किसान हाथ धो बैठे हैं। सरकार ने अब आलू और सेब की पछेती फसल की खरीददारी की जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम को दी है लेकिन घर बैठे ही 40 से 60 रुपये में बिकने वाला सेब निगम को 20 रुपये में किसान देंगे, इसे लेकर संशय बना हुआ है। किसानों ने सरकार से सस्ती फसल खरीदने के बजाय सड़क खुलवाने पर ज्यादा ध्यान देने की मांग की है।
गंगोत्री हाईवे बंद होने से अलग-थलग पड़े भटवाड़ी हर्षिल क्षेत्र में किसान कुल उत्पादन का अषाड़ी आलू 30 प्रतिशत तथा सेब 10 प्रतिशत उत्पादन करते थे। इस क्षेत्र में करीब दो हजार मीट्रिक टन आलू तथा पांच सौ मीट्रिक टन सेब की फसल से बर्बाद हो चुकी है। अगेती आलू निकालने के बाद किसान इन खेतों में कहीं राजमा, मटर तथा कुट्टू की फसल की बुआई भी करते लेकिन खेत खाली नहीं होने से ऐसा भी नहीं हो सका। दो फसलों की बर्बादी से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जहां तक जीएमवीएन के माध्यम से 20 रुपये प्रति किलो सेब तथा 10 रुपये प्रति किलो आलू की खरीद की बात है तो सितंबर से अक्टूबर तक तैयार होने वाली सेब, आलू की पछेती फसल ज्यादा टिकाऊ होती है। किसान डेलीसिस प्रजाति के एक्स्ट्रा लार्ज या लार्ज जैसे 40 से 60 रुपये किलो तक घर से ही हाथों-हाथ बिकने वाली फसल निगम को देंगे, इस पर संशय बना हुआ है।
खेत खाली न होने से नहीं बो पा रहे मटर
उत्तरकाशी। नटीण भटवाड़ी के महेंद्र पोखरियाल और भंगेली के कांति प्रसाद उनियाल कहते हैं कि उनके गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में कुल आलू उत्पाद का 50 प्रतिशत अषाड़ी आलू होता था। इन्हीं खेतों से कुट्टू की फसल भी ली जाती थी। लेकिन इस बार दोनों फसल बर्बाद हो गई।
गंगोत्री हाईवे को खोलें सरकार
उत्तरकाशी। हर्षिल के डा. नागेंद्र सिंह तथा सुक्की के मोहन सिंह राणा कहते हैं कि उपला टकनौर के आठ गांव के बगीचों में 20 प्रतिशत अषाड़ी सेब की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार सेब, आलू खरीदने की बात तो कर रही है, किंतु सितंबर-अक्टूबर तक गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है। सरकार सेब, आलू की पछेती फसल की अवधि तक सड़क तैयार करने के लिए धरातल पर काम क्यों नहीं करती।
