
राजपुर (सिरमौर)। जिले के खनन विभाग में स्टाफ की भारी कमी आड़े आ रही है। कम स्टाफ से काम चलाने के कारण विभाग पूरे क्षेत्र को कवर नहीं कर पा रहा है। वहीं लंबित पड़े सैकड़ों खनन के मामले की जांच के लिए भी स्टाफ की कमी खल रही है। जिले में 11 पद खनन निरीक्षक के इतने ही सहायक निरीक्षक एवं 24 पद खनन रक्षक के खाली हैं। सभी मिलाकर जिले में 46 पद रिक्त चल रहे हैं।
ग्रामीण अच्छर चौधरी, रामपाल, रमेश चंद, बालकराम आदि ने बाकायदा सरकार से खाली पदों को भरने की मांग कई बार की है। जिला कार्यालय, माइनिंग चैक पोस्टों, सब डिविजन तथा फिल्ड में स्टाफ के बिना जांच एवं कार्रवाई करना संभव नहीं है। यही नहीं बिना स्टाफ के अवैध खनन एवं खनन माफिया पर शिकंजा कसना भी आसान काम नहीं है।
इस समय जिले में राजपुर, ददाहू, राजबन तथा हैवना सहित चार खनन जांच पड़ताल केंद्र हैं। इतने ही सब डिविजन है जोकि पांवटा, संगडाह, नाहन, राजगढ़ तथा शिलाई में है। इन क्षेत्रों में स्टाफ तैनात होना चाहिए था लेकिन यहां ताले लटके हुए हैं।
इसके सिवाए कमरऊ, बनौर, रेणुका जी, त्रिलोकपुर तथा पांवटा से किल्लौड़ तक हरियाणा एवं उत्तराखंड की सीमा से सटे 27 किलो मीटर के क्षेत्र में एक भी पद सृजित नहीं है। जिले के चारों चैक पोस्टों पर कम से कम चार निरीक्षक सहित 12 रक्षकों का स्टाफ होता था लेकिन मौके पर केवल 10 खनन रक्षक तैनात हैं। इन खनन गार्डों की सरकार ने न पदोन्नति की है और न ही चालान करने की शक्तियां दी हैं। ऐसे में खनन माफिया काफी सक्रिय है।
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सरकार को समस्या से है अवगत कराया : शर्मा
‘‘जिला खनन अधिकारी संजीव शर्मा ने कहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार को समय-समय पर बाकायदा लिखित पत्र भी भेजे गए हैं लेकिन इस दिशा में सरकार ही कोई कदम उठा सकती है। फिलहाल जितना स्टाफ है उनसे काम लिया जा रहा है।
