
शिमला। हिमाचल सरकार खनन पर रोक के खिलाफ केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने 29 सितंबर को पक्ष रखेगी। इसके लिए उद्योग एवं पर्यावरण विभाग के अफसर नई दिल्ली जा रहे हैं। केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 5 अगस्त, 2013 को देशभर में नदी किनारों (रिवर बेड) से रेत निकालने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार की खनन पॉलिसी के उस प्रावधान पर भी रोक लग गई, जिसमें रेत निकालने को शॉर्ट परमिट दिए जाने थे। सरकार ने प्रावधान किया था कि लोग नदी किनारे की जमीन पर जमा रेत को एक मीटर गहराई तक निकाल सकेंगे। इसके लिए कम अवधि के परमिट दिए जाएंगे। इससे राज्य में रेत की तस्करी रुकनी थी और निर्माण कार्यों के लिए इसकी किल्लत भी दूर होनी थी।
यह खनन रुकने से जहां ट्रैक्टर चालकों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है, वहीं निर्माण कार्यों के लिए भी रेत और बजरी का संकट बढ़ गया है। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट ने खनन रोकने के लिए उठाए कदमों पर हिमाचल सरकार की तारीफ की है। इसी आधार पर सरकार अपना पक्ष ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने रखने जा रही है। उम्मीद है राज्य सरकार को राहत मिलेगी। रेत के खनन पर प्रतिबंध के कारण यह अब राष्ट्रव्यापी समस्या है।
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34 होटल बंद करने के आदेश
शिमला। केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शिमला में सुनवाई के दौरान ब्यास किनारे स्थित उन 34 होटलों को बंद करने के आदेश दिए हैं, जो प्रदूषण फैला रहे हैं और जिन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस दिए हुए हैं। ट्रिब्यूनल को बोर्ड ने बताया कि ब्यास किनारे कुल्लू से मनाली के बीच 129 होटल हैं। इनमें 34 बिना अनुमति के काम कर रहे हैं। टिब्यूनल ने डलहौली की खजियार झील के अस्तित्व को बचाने के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया है। मुख्य वन अरण्यपाल इसके अध्यक्ष होंगे।
