
लोहाघाट। चमनपुर और बैड़ाबैड़वाल गांव में 2008 में बादल फटने की घटना के बाद हुई तबाही से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था सरकार नहीं कर पाई है। अब स्थिति यह है कि खतरे से घिरे लोगों ने खुद ही इन इलाकों से पलायन कर दिया है।
चमनपुर में 2008 में बादल फटने के बाद से लगातार भूस्खलन हो रहा है। गांव के ऊपर से सड़क बनने के कारण वहां का नाला लगातार गहराई लेकर आबादी की ओर बढ़ता जा रहा है। खतरे के कारण खिलानंद जोशी, गिरीश चंद्र, गोपालदत्त, प्रयाग दत्त, अंबा दत्त, भुवन चंद्र, नारायण दत्त आदि लोग तो गांव से पलायन कर चुके हैं। कुछ परिवार गांव छोड़ने की तैयारी में हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता चेतराम शर्मा के अनुसार इस गांव के लोगाें को विस्थापित करने के लिए झिरकुनी ग्राम पंचायत द्वारा पहले ही जिला प्रशासन को प्रस्ताव दिया जा चुका है। यहां के लोग इस गांव में जाने के लिए तैयार भी बैठे हुए हैं। मल्ली बैड़ा में भी पांच मकान खतरे की जद में आए हुए हैं। रीठा परेवा कलौता तोक के 20 परिवार खतरे में जीने को मजबूर हैं। तड़ीगांव का घंटाक तोक, डोबाभागू का नौलीखोला तोक, मौनकांडा का सिमली तोक आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। इन तोकों में रहने वाले लोगों का अन्यत्र विस्थापन न किए जाने की स्थिति में कभी भी अनहोनी हो सकती है।
