खतरे से खाली नहीं सेब बहुल क्षेत्र की लाइफ लाइन पर सफर

रोहडू। सेब बहुल क्षेत्र की लाइफ लाइन ठियोग-हाटकोटी रोहडू मुख्य सड़क पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है। हालत यह है कि मार्ग पूरी तरह से दलदल और गड्ढों में बदल गया है। कई स्थानों पर तो सड़क पानी के तालाब में बदल गई है। सेब से लदे ट्रक और छोटे वाहन मार्ग पर जगह-जगह फंस रहे हैं। वहीं, सेब सीजन से पहले सड़क की हालत सुधारने के सभी सरकारी दावे खोखले साबित हुए हैं।
कीचड़ और पानी से भरी सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। मरम्मत के नाम पर सड़क पर मिट्टी बिछाई गई है। वर्षा होने पर सड़क गाद से भर गई है। इसी मार्ग होते हुए साठ प्रतिशत सेब प्रदेश और बाहरी राज्यों की मंडियो में जाता है। सड़क की खस्ता हालत बागवानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। हालांकि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 के सेब सीजन से पहले सड़क को पक्का करने का दावा किया था। लेकिन सड़क की स्थिति ने सभी दावों की पोल खोल कर रख दी है। शिमला पहुंचने के लिए दोगुना समय लग रहा है। कई बार तो रात-रात भर वाहन जाम में फंसे रहते हैं। टूटी फुटी सड़क पर छोटे वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है। सड़क का निर्माण कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा गया है, लेकिन एक वर्ष से सड़क पर निर्माण के नाम पर एक प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है।
क्या कहते हैं रोड प्रोजेक्ट अधिकारी
स्टेट रोड प्रोजेक्ट अधिशासी अभियंता आरएस जसवाल ने बताया कि सड़क की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। सड़क का कार्य सेब सीजन के बाद तेजी से शुरू किया जाएगा।
क्या कहना है फल उत्पादक संघ का
फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेश महासचिव हरीश चौहान ने बताया कि ठियोग-हाटकोटी रोहडू सड़क बागवानों की लाइफ लाइन है। सड़क को तीन माह में पक्का करने का दावा कांग्रेस सरकार ने किया था। अब सत्ता में आने के दो साल बाद भी सरकार सड़क को ठीक नहीं कर पाई है। सड़क पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है।

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