
चैलचौक (मंडी)। जिले के पहाड़ों में दुर्लभ जड़ी बूटियों का अस्तित्व खतरे में है। जंगलों में अवैज्ञानिक दोहन से प्राकृतिक तौर पर उगने वाली वन औषधि लुप्त होने के कगार पर है। चोरी छिपे जड़ी बूटियों का कारोबार करने वाले व्यापारी जंगलों में मजदूर लगाकर बहुमूल्य जड़ी बूटियों को मंडियों में पहुंचा रहे हैं। इनका अस्तित्व बचाए रखने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने वन औषधियों की तस्करी और अंधाधुंध दोहन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। बावजूद इस पर रोक नहीं लग सकी है। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश से हर साल करीब पांच सौ करोड़ की जड़ी बूटियों की तस्करी हो रही है। मंडी जिले के कमरूनाग, शिकारी देवी और देवीदहड़ के पहाड़ों में वन औषधियों का अवैध खनन हो रहा है। गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिक हेमंत बडोला का कहना है कि वन औषधियों का अवैज्ञानिक दोहन जड़ी बूटियों के लिए चिंता का विषय है। डीएफओ नाचन पीडी डोगरा ने बताया कि कमरूनाग और शिकारी देवी के पहाड़ों में अगर जड़ी बूटियों का कोई अवैध खनन कर रहा है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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कमरूनाग और शिकारी देवी पहाड़ों पर सालम पंजा, सालम मिश्री, वन ककड़ी, खुरासानी, कडू, मुश्क बाला, रतन जोत, अतीश, धूप, रखाल, शिंगली मिंगली, शोठी जैसी औषधियां पाई जाती हैं।
उपयोग: गठिया रोग, पेट दर्द, बुखार, शूल, तेल, बिच्छु दंश, कास रोग, अधरंग, कैंसर, गर्भाशय वेदना, अतिसार और नपुंसकता में उपयोगी।
