
कंडवाल (कांगड़ा)। कांगड़ा घाटी की लाइफ लाइन कही जाने वाली पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन को आने वाली बरसात एक बार फिर झटका दे सकती है। जिस प्रकार चक्की रेल पुल के करीब एक दर्जन पिल्लरों के सुरक्षा कवच (स्लैब) क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उससे एक बार फिर कांगड़ा घाटी रेल की रफ्तार पर ब्रेक लग सकती है। इस समय पठानकोट जोगिंद्रनगर रेल ट्रैक पर चक्की पुल के करीब एक दर्जन पिल्लरों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए सुरक्षा कवच बारिश से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे इस पुल के पिल्लरों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। कांगड़ा घाटी को पंजाब से जोड़ने वाली पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल ट्रैक पर आने वाले दिनों में बारिश कहर मचा सकती है। वहीं, रेलवे विभाग ने पहले तो पुल की सुरक्षा के लिए लाखों के सुरक्षा कवच बनाए जो बारिश की मार न सह सके और विभाग वहीं पर क्रेटवॉल लगाकर पुल की सुरक्षा को पुख्ता करने में जुटा हुआ है। इस पर लोगों की निगाह लगी हुई है। करीब सात माह पूर्व रेलवे ने लाखों खर्च करके पिल्लरों की सुरक्षा के लिए जो सुरक्षा कवच बनाए थे, उनके बरसात की मामूली बारिश में क्षतिग्रस्त होने से रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिह्न लग गया है। सात माह पूर्व चक्की रेल पुल से सटी नदी का बहाव तथा उसका तल एक समान था, लेकिन रेलवे ने पुल के निकट खड्ड को खोदकर तथा वहां से खनन करके रेल पुल की सुरक्षा को खतरा पैदा कर दिया। रेल पुल के नीचे से बहती नदी एक कैनियन का रूप धारण कर चुकी है जो अब धीरे-धीरे रेल पुल के पिल्लरों के लिए खतरा बनती जा रही है।
पिल्लरों की स्थिति पर जताई चिंता
कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डा. राजन सुशांत ने चक्की रेल पुल के पिल्लरों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त होने पर चिंता जताई है। कहा कि रेलवे की ओर से लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त होने का मामला चिंताजनक है। इस बारे में वह शीघ्र रेलवे मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से बात करेंगे।
क्रेटवॉल का निर्माण करवाया जा रहा : मंजीत
रेलवे के सहायक अभियंता मंजीत गोयल ने माना कि बारिश से पिल्लरों की सुरक्षा के लिए बनाए कवच क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा विभाग ने पुल के निकट क्रेट लगाने का काम शुरू किया है, ताकि रेल पुल के पिल्लरों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
