खतरनाक नशे की गिरफ्त में टीन एजर्स

कोटद्वार। शहर और समीपवर्ती क्षेत्र के किशोर खतरनाक नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। ऐसे किशोर स्कूल जाने के बजाय नशे के जुगाड़ में रहते हैं।
कोटद्वार शहर के कई किशोर बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में हैं। इनमें अधिकांश दसवीं-बारहवीं के छात्र हैं। विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। ऐसे छात्र अक्सर विद्यालय से गायब रहते हैं। उन्होंने नशा करने के ठिकाने बना रखे होते हैं। छात्र के विद्यालय न आने का शिक्षक भी संज्ञान नहीं लेते। जबकि माता-पिता को तो यह पता रहता है कि उनका बेटा स्कूल गया है।

किस तरह का होता है नशा
नशा करने वालों ने तथाकथित पारंपरिक नशे को छोड़कर नए तरह के नशे शुरू कर दिए हैं। शराब, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू आदि इनके लिए कोई नशा नहीं है। इनके नशे में फ्ल्यूड, फेवीबांड, सुलफा, आयोडैक्स और नशे की गोलियां रहती हैं। इंसान को इतना आदी बना देता है कि इससे बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाता है।

इन जगह पर हैं अड्डे
ऐसे किशोरों के अड्डे अक्सर हाइडिल कालोनी के पीछे पुराने भवनाें में, लकड़ी पड़ाव के खाली प्लाटों में, सनेह क्षेत्र के जंगलों में हैं। स्कूल समय में ऐसे छात्र विद्यालय से दूर घूमते हुए नजर आ जाते हैं।

दो मामले आए सामने
– पुलिस रिकार्ड में इस वर्ष नशा बेचने के आरोप में आठ लोगों को पकड़ा गया है। इसमें एक 16 वर्ष का किशोर भी शामिल है। 16 अगस्त को जीआईसी में तीन युवक नशा करते हुए पकड़े गए। जबकि वहां पर कई बार 20-25 लड़के जमा रहते थे। ऐसे भी कई मामले होते हैं जिनको इसलिए दर्ज नहीं किया जाता कि भविष्य में वह सुधर जाए।

कोट-
इस तरह के मामलों में लगातार नजर रखी जा रही है। विद्यालयों में नशे के प्रति युवाओं में जागरूकता के लिए लगातार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बीच में कुछ व्यवधान भी हो जाते हैं, लेकिन समय मिलते ही इसको शुरू किया जाता है। -अरुणा भारती, सीओ

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