क्षतिग्रस्त सड़कें बचाव और राहत में बाधा

गढ़वाल। बारिश के साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कें भी आपदा से बचाव और राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी है। गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति तो ऐसी है कि उन्हें महीनों तक दुरुस्त करना मुमकिन नहीं लग रहा है। जिला मार्गों की स्थिति भी बदहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों को खोलने की दिशा में तो अभी कोई कदम ही नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में आपदा से पीड़ित ग्रामीणों की दिक्कतें और बढ़ गई है। गढ़वाल मंडल में अभी भी 454 सड़कें बंद है। जिससे हजारों गांवों का यातायात संपर्क कटा हुआ है। मंडल में सर्वाधिक 122 सड़कें पौड़ी जिले में बंद है। उत्तरकाशी में 52, चमोली में 45, रुद्रप्रयाग में 51, टिहरी में 103, देहरादून में 62 और हरिद्वार में 19 सड़कें बंद हैं।
पौड़ी में बरसात से जिले भर में 257 सड़कें बंद हुई थी। हालांकि इनमें 135 सड़कों पर यातायात सुचारु हो चुका है। बावजूद इसके 122 सड़कें अब भी बंद हैं। लोनिवि के अनुसार जिले में सर्वाधिक 25 सड़कें लोनिवि निर्माण श्रीनगर में बंद है। इसके साथ ही प्रांतीय खंड पौड़ी में 21, निर्माण खंड में 19, बैंजरों 13, लैंसडौन में पांच, दुगड्डा में 13, सिंचाई खंड श्रीनगर और कोटद्वार की 16, एडीवी की 6, पीएमजीएस वाई की तीन व एनएच धूमाकोट की एक सड़क भी बंद है। पैठाणी कर्णप्रयाग मोटर मार्ग बंद होने से इस सड़क से जुड़े 35 गांवों के लोग सड़क तक पहुंचने के लिए चार से 24 किमी पैदल चल रहे हैं। लोनिवि श्रीनगर निर्माण खंड में पौड़ी-खिर्सू-श्रीनगर मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त होने से नहीं खोला जा सका है। अरकणी-खंदूखाल, गंगा दर्शन मोड़-एनएच-58, चोपड़ा-नलई मोटर मार्ग भी नहीं खुले हैं।
चमोली जनपद में निजमुला, पोखरी, घाट, जोशीमठ, नारायणबगड़, पिंडर क्षेत्रों में सड़कें अवरुद्ध होने से रसोई गैस, रसद और मिट्टी तेल का संकट गहराने लगा है। कर्णप्रयाग-ग्वालदम मार्ग पर नारायणबगड़ तक यातायात बहाल नहीं हो पाया है। मींग गदेरा, बुसेड़ी पुल, थराली पेट्रोल पंप के निकट भी 50 से 100 मीटर तक सड़क ध्वस्त हो चुकी है। मार्ग के नारायणबगड़ से थराली के बीच अवरुद्ध होने से हरमनी, मींग गदेरा और कुलसारी से लगे करीब साठ से अधिक गांवों में जरूरी वस्तुओं का अकाल पड़ा है।
थराली-देवाल-मुंदोली मार्ग पर थराली बाजार में पुल और सड़क के बीच सत्तर मीटर की गहरी खाई बन चुकी है। बाजार से राड़ीबगड़ तहसील मुख्यालय तक डेढ़ किमी सड़क ध्वस्त है। लोग सात किमी पैदल चलकर थराली पहुंच रहे हैं। सोलपट्टी क्षेत्र के 18 गांवों का संपर्क कटा हुआ है। नंदकेशरी-ग्वालदम मार्ग भी मलबे में पटा है। लोहाजंग-वाण, आदिबदरी-नौटी मार्ग भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। वहीं देवाल-घेस, देवाल-सवाड़, थराली-कुराड़, सिमली-शैलेश्वर, नारायणबगड़-किमोली, नारायणबगड़-कौब, थराली-डुग्र्री-रतगांव, बाटाधार-गौल मार्ग भी अवरुद्ध हैं।
टिहरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली 103 सड़कें अब भी नहीं खुल पाई हैं। जिससे ग्रामीणों क्षेत्रों में जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है। जौनपुर में औंतण बंगसील गांव के लोगों को तो 12 किमी तक पैदल चलकर पीठ पर सामान ढोना पड़ रहा है। प्रधान खेमराज पुजारी कहते हैं कि सड़क बंद होने से गांव का संपर्क कट गया है। दुकानों में सामान खत्म हो गया है। जरूरी सामान के लिए 13 किमी पैदल थत्यूड़ जाना पड़ रहा है। नौगांव के श्याम लाल, बंगसील के नत्थीलाल गौड़ कहते हैं कि मरीजाें को थत्यूड़ अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। भिलंगना के सीमांत क्षेत्रों से लगे ग्रामीण भी 5 से 8 किमी पैदल नापने को मजबूर हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-चौमासी सड़क कई जगहाें पर क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पैदल पुलाें और सड़क के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र का संपर्क अन्य स्थानाें से कट गया है। कालीमठ के प्रधान अव्वल सिंह, दिलवर सिंह, सुनील भट्ट ने बताया कि कालीमठ, कोटमा, कविल्ठा, जाल मल्ला, जाल तल्ला समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांवाें को जोड़ने वाले पैदल पुल बह गए। गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा मोटर मार्ग भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से बाधित है।

सड़कें क्षतिग्रस्त होने से दिक्कतें
– गांवों में नहीं पहुंच पा रही है रसद
– मिट्टीतेल और रसोई गैस का भी हुआ संकट
– बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दिक्कतें
– राहत और बचाव कार्यों में हो रहा व्यवधान

जनपद बंद सड़कें
पौड़ी 122
उत्तरकाशी 52
चमोली 45
रुद्रप्रयाग 51
टिहरी 103
देहरादून 62
हरिद्वार 19

कोट-
बंद सड़कों को खोलने के लिए 197 मशीनें लगाई गई है। वरीयता के अनुसार सड़कों को खोलने का कार्य चल रहा है। – आरपी भट्ट, मुख्य अभियंता लोनिवि गढ़वाल

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