
शिमला। हिमाचल में 1.90 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू करुणामूलक भर्ती नीति पर कुछ अहम सवाल उठे हैं। वीरवार को सचिवालय में कार्यवाहक मुख्य सचिव पी. मित्रा की अगुवाई में हुई सचिव समिति (सीओएस) की बैठक हुई। इसमें सभी विभागों के प्रशासनिक सचिव शामिल थे। इसमें कई सचिवों ने दो मुद्दों पर आपत्ति जताई।
पहला ये कि जमा दो पास आवेदकों को अनुकंपा आधार की नियुक्तियां क्लास थ्री कैटेगिरी में क्यों दी जा रही हैं? बैठक में वित्त विभाग की ओर से बताया गया कि यह नई बात नहीं है। क्लास थ्री में पहले भी नियुक्तियां हुई हैं। सचिवों का तर्क था कि इससे तो पहले क्लास फोर में भर्ती जमा दो पास आवेदक अपने हक के लिए कोर्ट जा सकते हैं। दूसरी आपत्ति ये थी कि पिछले कुछ समय से अनुकंपा आधार के केस ज्यादा आ रहे हैं और विभाग या निगम-बोर्ड इनके लिए तय 5 फीसदी कैडर कोटा का पालन नहीं कर रहे। इस पर वित्त विभाग की ओर से कहा गया कि इस बारे में नए सिरे से दिशा निर्देश सभी विभागाध्यक्षों को भेजे जाएंगे।
किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मौत होने पर उसके आश्रितों में से पत्नी या बच्चों को अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी दी जाती है। यह पॉलिसी पहले कार्मिक विभाग देखता था और वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होती थी। लेकिन इसी साल सरकार ने यह भर्ती नीति पूरी तरह से वित्त विभाग को सौंप दी है। बीच बीच में कई बार हुए बदलावों के कारण इस नीति पर काफी विवाद रहे हैं।
