कोरोना वैक्सीन : दुनिया में असमानता बढ़ने का जताया जा रहा है खतरा

कोरोना वैक्सीन : दुनिया में असमानता बढ़ने का जताया जा रहा है खतरा

वाशिंगटन
कोरोना वैक्सीनों से अब महामारी के अंत के साथ आर्थिक हालात सुधरने के संकेत तो मिलने लगे हैं, लेकिन इससे दुनिया में असमानता बढ़ने का भी खतरा जताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक ओर यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देशों ने बड़ी मात्रा में टीकों का भंडारण कर लिया है, जबकि विकासशील और गरीब देश अपने हिस्से की खुराक पाने के लिए जूझ रहे हैं।

अगर यही स्थिति रही तो आगामी दिनों में कमजोर देशों की अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा डगमगा जाएंगी, जिससे दुनिया में आर्थिक और सामाजिक खाई और गहरी होगी। इससे पूरी दुनिया को सालाना 153 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
विकासशील देशों को दोगुना नुकसान
इंग्लैंड के संक्रामण रोग विशेषज्ञ मार्क एक्लेस्टन टर्नर के मुताबिक, दुनिया के लिए यह शर्म की बात है कि लोगों तक वैक्सीन जरूरत के बजाय भुगतान क्षमता के हिसाब से पहुंच रही है। भारत में वैक्सीन उत्पादन की काफी क्षमता है, जहां एस्ट्राजेनेका टीका बना रही है।

इसके बावजूद 2024 से पहले पूरी भारतीय आबादी को टीका नहीं लग पाएगा। ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स के अनुसार, 2025 तक धनी देशों के मुकाबले विकासशील एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महामारी से दोगुना नुकसान होगा।

बंट जाएंगे वैक्सीन और बिना वैक्सीन वाले देश
जानकारों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में पहले से ही स्वास्थ्य-शिक्षा, आय और पानी-बिजली समेत इंटरनेट को लेकर भारी असमानता है। अब आगे इस सूची में वैक्सीन का नाम भी जुड़ जाएगा यानी भविष्य में पर्याप्त और अल्प टीके वाले देशों के रूप में बड़ी खाई खड़ी हो जाएगी। गरीब देशों को तो अपने अल्प संसाधनों से ही गुजारा करना पड़ेगा और वहां महामारी से फैली तबाही जारी रहेगी।

सबसे बड़ी जरूरत पर भी निजी हित हावी
संयुक्त राष्ट्र कॉन्फ्रेंस में वैश्वीकरण के निदेशक रिचर्ड कोजुल राइट बताते हैं कि फिलहाल वैक्सीन मानवता के लिए एक बड़ी जरूरत है। इसके बावजूद इस पर फार्मा कंपनियों और विकसित देशों का ही नियंत्रण है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और बिल-मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के तत्वावधान में एक्ट-एक्सीलरेटर पार्टनरशिप ने कमजोर देशों तक वैक्सीन पहुंचाने का बीड़ा उठाया है, लेकिन इनके पास सिर्फ पांच अरब टीके ही उपलब्ध हैं, जबकि लक्ष्य 38 अरब का है।

यूरोपीय देशों में कोविड रोकथाम के लिए सामूहिक टीकाकरण की शुरुआत
कोरोना टीके को लेकर आशंकाओं के बीच महामारी की रोकथाम के लिए यूरोपीय देशों ने भी रविवार को सामूहिक टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी। इसके तहत करीब 45 करोड़ बेहद संवेदनशील लोगों को टीका लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि इटली यूरोपीय संघ का सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश है, जहां करीब 72,000 लोगों की मौत हो चुकी है। यूरोपीय संघ के कुल 27 देशों में 1.6 करोड़ लोग संक्रमित हुए, जिनमें से 3.36 लाख लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।

यूरोपीय संघ में शामिल 27 देशों के स्वास्थ्य कर्मियों, बुजुर्गों और प्रमुख नेताओं को शुरुआत में टीका लगाया जाएगा। लोगों को आश्वस्त किया जाएगा कि टीकाकरण सुरक्षित है और कोरोना महामारी से उबरने का बेहतरीन मौका भी।

रोमानिया में सबसे पहले कोविड का टीका लगवाने वाली बुखारेस्ट के मैती बाल्स इंस्टीट्यूट की नर्स मिहेला एंगेल ने कहा, इससे कोई नुकसान नहीं है। अपनी आंखें खोलिये और टीका लगवाएं। रोम में रविवार को टीका लगवाने वाले पांच डॉक्टरों और नर्सों में से एक डॉ मारिया रोसारिया केपोबिआंची ने कहा कि यह उम्मीद और भरोसे का संदेश है और अपनी पसंद को साझा करने का निमंत्रण भी। इससे चिंतित होने का कोई कारण नहीं है। डॉ मारिया स्पालंजानी में वीषाणु प्रयोगशाला की प्रमुख हैं और इस साल फरवरी में इस वायरस से लोगों को बचाने वाली टीम का हिस्सा हैं।

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