
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से एक बार फिर दुनिया के कई देश सशंकित हैं। बीते कुछ महीनों में कोरोना के नए मामले कम हो रहे थे, लेकिन अब नए मामलों की संख्या एक बार फिर से बढ़ने लगी है। यूरोप के कई देश दोबारा लॉकडाउन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इटली, स्पेन, ब्रिटेन जैसे देशों में सरकारों के सामने संक्रमण की रफ्तार कम करने की चुनौती है। दुनियाभर के कई विशेषज्ञों ने सर्दियों में कोरोना का कहर बढ़ने की आशंका जताई है। कोरोना वायरस के म्यूटेशन यानी रूप बदलने की प्रवृत्ति को वैज्ञानिक शुरू से ही खतरनाक बताते आ रहे हैं। अब एक बार फिर कोरोना वायरस के म्यूटेशन को दुनियाभर में बढ़ते संक्रमण का कारण बताया जा रहा है।
अमेरिका में हुए एक नए अध्ययन के मुताबिक, कोरोना के म्यूटेशन से तैयार होने वाला वायरस अब हावी हो रहा है। अमेरिका के टेक्सास के अस्पताल में भर्ती हुए पांच हजार मरीजों पर किए गए अध्ययन में बताया गया है कि ज्यादातर नए मामलों के लिए कोरोना का बदला रूप यानी D614G स्ट्रेन जिम्मेदार है। बीते अगस्त में मलयेशिया में भी यह स्ट्रेन पाया गया था, जिसके बारे में कहा जा रहा था कि यह 10 गुना ज्यादा संक्रामक है।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कोरोना वायरस का नया रूप मूल वायरस से अधिक संक्रामक है। इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पांच हजार कोरोना मामलों के लिए जिम्मेदार वायरस के स्ट्रेन का विश्लेषण किया, तो यह जानकारी सामने आई है। बता दें कि सबसे पहले यूरोप में कोरोना वायरस के D614G स्ट्रेन फैलने की जानकारी सामने आई थी।
पहली बार फरवरी में यूरोप में कोरोना वायरस के D614G स्ट्रेन की जानकारी मिली थी, जो कुछ ही हफ्ते में यूरोप से अमेरिका और फिर एशियाई देशों में फैल गया। वैज्ञानिक अभी भी इस बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर क्यों SARS-CoV-2 का यह रूप दुनिया के बड़े हिस्से में तेजी से फैला।
कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में वायरस के D strain से ज्यादातर लोग संक्रमित हो रहे थे, लेकिन मार्च तक D614G स्ट्रेन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैल गया था और कुल संक्रमण में एक चौथाई मामलों के लिए इसे ही जिम्मेदार बताया गया। वहीं, मई तक D614G स्ट्रेन वाले केस की संख्या 70 फीसदी हो गई।
अब दुनिया के कुल मामलों में से 85 फीसदी से ज्यादा संक्रमण फैलने का जिम्मेदार D614G स्ट्रेन को बताया जा रहा है। बता दें कि इस अध्ययन से पहले अगस्त में सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी के सीनियर कंसल्टेंट पॉल तांबयाह ने भी कोरोना वायरस के D614G स्ट्रेन के अधिक संक्रामक होने के बारे में बताया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि मूल वायरस की तुलना में यह कम जानलेवा है।
