
नूरपुर( कांगड़ा)। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की बटालियन के लिए नए सिरे से भूमि तलाशने के राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह के बयान से नूरपुर में प्रस्तावित आपदा प्रबंधन बटालियन को स्थापित करने की कवायद को तगड़ा झटका लगा है।
हैरानी की बात है कि पूर्व भाजपा शासनकाल के दौरान भूकंप की दृष्टि से अति संवेनशील जोन-5 में कोपड़ा (नूरपुर) में प्रस्तावित बटालियन के लिए बाकायदा चिन्हित की गई 23 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण को संबधित केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से करीब 3 साल पहले सैद्घांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके लिए यूजर एजेंसी (आईटीबीपी) को वन भूमि की नेट प्रजेंट वेल्यू करीब 1.52 करोड़ व प्रतिपूर्ति पौधारोपण निधि में 55 लाख रुपए जमा करवाने हैं। इतना ही नहीं, लैंड एक्यूजिशन एक्ट के तहत एसडीएम कार्यालय के मार्फत बटालियन के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली 17-51-21 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण से जुड़ी औपचारिकताओं को भी पूरा किया जा चुका है। बल्कि इसका तकरीबन 12 करोड़ 67 लाख 90 हजार रुपए का मुआवजा भी तय किया जा चुका है। इस सब के बावजूद यूजर एजेंसी ने अब तक न तो वन भूमि की एनपीवी जमा करवाई है और न ही निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए कोई पहल की है। ऊपर से अब प्रदेश सरकार की बटालियन के लिए नए सिरे से जमीन तलाशने की मंशा से नूरपुर में प्रस्तावित आपदा प्रबंधन बटालियन की स्थापना पर संशय गहरा गया है।
सारी औपचारिकताएं हुई पूरीं
एसडीएम नूरपुर अश्वनी सूद की मानें तो निजी भूमि के अधिग्रहण से जुड़ी तमाम कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। इसके लिए यूजर एजेंसी को 18 सितंबर 2014 तक मुआवजा राशि जमा करवानी होगी। अन्यथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रद हो जाएगी।
मुआवजा मिले तो कोई आपत्ति नहीं : प्रधान
कोपड़ा पंचायत के प्रधान कुशल सिंह के मुताबिक बटालियन की स्थापना को लेकर ग्रामीणों का कोई विरोध नहीं है। हालांकि, निजी भूमि के अधिग्रहण को लेकर मुआवजे पर कुछेक भू-मालिकों ने जरूर आपत्ति जताई थी। अगर उन्हें उचित मुआवजा मिलता है तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी।
