कोड वर्ड में फंसी ‘चिरैया’ की जान

देहरादून। फूल-सी कोमल बच्चियां घर आंगन की रौनक हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड सेंटरों के कोड वर्ड इस चिरैया की जान केदुश्मन बन गए हैं। दुनिया में बगैर आंख खोले बच्चियां दूसरी दुनिया को विदा कर दी जा रही है। जानकारों की मानें तो हर सेंटर पर कुछ कोड वर्ड निर्धारित हैं। लड़के के लिए लड्डू, लड़की के लिए बर्फी जैसे शब्दों का प्रयाग कर अभिभावकों तक संदेश पहुंचाया जाता है। अगर कोई कहे ‘बर्फी पसंद नहीं’ तो समझ लीजिए कि इन्हें मिटाने की तैयारी है।
अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सख्ती के तमाम दावे डाक्टरों के खेल और कोड वर्ड की आड़ में हवा हो रहे हैं। सच यह है कि यहां अब भी लिंग जांच कर कन्याओं को मिटाया जा रहा है। पीसीपीएनडीटी कमेटी की स्टेट मेंबर डा. गीता बलोदी खुद नियमों के हवा-हवाई होने की बात स्वीकारती हैं। उनके मुताबिक कई बार मौकेपर छापेमारी के दौरान यह बात सामने आई है कि सीधे लिंग जांच और भ्रूण हत्या करने से मना करने के बावजूद कोड वर्ड के माध्यम से बेटियाें को मिटाने की कार्रवाई के संकेत मिले हैं। खास तौर से शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में ऐसा जोर-शोर से चल रहा है। उनकी मानें तो कुछ जगह ‘माता का जयकारा’ या ‘बाबा की जय’ जैसे कोड वर्ड के जरिए भी अभिभावकाें तक बेटा है या बेटी को पुख्ता करता संदेश पहुंचाया जाता है। यही संदेश बेटियों की जान के लिए मुसीबत बने हुए हैं।

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