
शिमला। नादौन में स्थापित होने वाले प्रदेश के पहले स्पाइस पार्क पर फैसला अब कैबिनेट की बैठक में होगा। राज्य कृषि विभाग ने नादौन के पास स्थित कृषि विश्वविद्यालय की जमीन को आगे लीज पर देने से इनकार कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि ने इस बारे में लीज रूल्स का हवाला देते हुए पत्र प्रधान सचिव (उद्योग) को भेज दिया है। बड़ा में यह जमीन कृषि विज्ञान केंद्र के लिए लीज पर कृषि विवि को दी गई है। इससे प्रोजेक्ट और उलझ गया है।
हालांकि, नादौन के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू कहते हैं कि वह भारत सरकार की नेशनल काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च से इस बारे में एनओसी ले आए हैं। राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि कैबिनेट में अब इस पर फैसला लिया जाए। दरअसल कृषि विवि की जमीन लीज पर देने के लिए आगे 5 फीसदी लीज मनी देने की शर्त लगाई गई है। पार्क चूंकि स्पाइस बोर्ड को स्थापित करना है, लेकिन वह 5 फीसदी के हिसाब से सालाना करीब 20 लाख रुपये देने को तैयार नहीं है। भूमि विवाद के कारण यह प्रोजेक्ट पिछले तीन साल से फंसा हुआ है।
17 करोड़ की लागत से बनने वाला यह पार्क अप्रैल 2010 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने क्लीयर किया था। लेकिन भूमि चयनित और ट्रांसफर न होने के कारण कृषि विवि और केंद्रीय स्पाइस बोर्ड के बीच एमओयू नहीं हो पाया है। इस कारण प्रोजेक्ट के लिए दिया गया धन भी प्रदेश सरकार को नहीं मिल पाया। अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि दीपक सानन कहते हैं कि उद्योग विभाग ने कृषि विवि की जमीन मांगी थी, जो पहले से ही लीज पर है। उन्हें लीज रूल्स के हिसाब से पत्र भेज दिया गया है।
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यह होगा स्पाइस पार्क में
स्पाइस पार्क में नेशनल स्पाइस बोर्ड ने निर्यात किए जाने वाले मसाले तैयार करने हैं। इसमें न केवल किसानाें को इनकी खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, बल्कि इसकी पैकिंग और मार्केटिंग भी होगी। किसानों को मसालों की उन्नत किस्में भी पार्क उपलब्ध करवाएगा।
