
शिमला। सजा काट रहे कैदियों को आरटीआई के तहत जानकारी लेने का अधिकार नहीं है। कैदी केवल अपने अधिकारों से संबंधित जानकारी ही आरटीआई के तहत ले सकते हैं।
हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त ने सब जेल हमीरपुर के एक अंडर ट्रायल बंदी करण ठाकुर की अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। इस शॉर्ट ऑर्डर में आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सजा के दौरान कैदी के अधिकार संस्पेंड रहते हैं। कर्ण ने जेल में लगे कैमरों में आए खर्चे और उसके कुछ फुटेज मांगे थे। उसने अपना पता केयर ऑफ जेल सुपरिंटेंडेंट सब जेल हमीरपुर दिया था। जेल प्रबंधन की ओर से जानकारी उपलब्ध भी करवा दी गई थी, लेकिन बंदी कर्ण यह कहकर अपील में चला गया कि उसे अधूरी जानकारी दी गई। उसी पर आयोग ने यह निर्णय सुनाया और बंदी की अपील खारिज कर दी।
राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश ने बताया कि आरटीआई के तहत कोई भी अधिकारी जानकारी ले सकता है, लेकिन किसी अपराध में जेल में सजा काट रहे कैदियों के कानून के तहत दिए सभी अधिकार सस्पेंड हो जाते हैं।
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विदेशियों को भी नहीं है अधिकार
दूसरे देश के नागरिक को भी आरटीआई के तहत जानकारी लेने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा किसी कंपनी के नाम पर भी जानकारी नहीं ली सकती है। सजा के दौरान कैदी उसे दिन में खाने के लिए कितनी डाइट मिलनी चाहिए, जेल मैनुअल के अनुसार एक कैदी के क्या अधिकार हैं, आदि की जानकारी ले सकता है।
