कैदियों के लिए बदले पैरोल नियम

शिमला। हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों के लिए पैरोल के नियम आसान कर दिए गए हैं। अब उन्हें हर बार न तो जिला प्रशासन, न जिला पुलिस और न ही पंचायत प्रतिनिधियों की वेरिफिकेशन से गुजरना होगा। उक्त अथॉरिटी की वेरिफिकेशन तीन साल तक वैध रहेगी। इतना ही नहीं, पैरोल पर जाने से पहले परिजनों की ओर से जो सिक्योरिटी बांड भरा जाता था, वह भी तीन साल में एक बार ही भरा जाएगा। उम्र कैद की सजा काट रहे कैदियों के लिए यह बांड 2 लाख और अन्य कैदियों के लिए यह 1 लाख रुपये निश्चित किया गया है। इसे जिला प्रशासन के पास जमा करवाना होता है। प्रदेश की 14 जेलों में 86 महिलाओं सहित कुल 1886 कैदी हैं। इनमें 951 सजायाफ्ता कैदी हैं और 935 अंडरट्रायल हैं। इनमें 9 विदेशी भी सजा काट रहे हैं। आम तौर पर कैदी पैरोल पर खेतीबाड़ी, घर में शादी-विवाह आदि कार्यक्रमों में भाग लेने आदि के लिए जाते हैं।

अभी तक ये थी व्यवस्था
जितनी बार भी कैदी पैरोल पर जाते हैं, उनकी हर बार स्थानीय पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित पंचायत और पीड़ितों की ओर से वेरिफिकेशन करवाई जाती थी। पीड़ितों से पूछा जाता था कि अगर उक्त कैदी को छोड़ा जाए, तो उससे किसी को कोई खतरा तो नहीं है।

इन्हें मिलता है पैरोल
जेल मैनुअल के तहत जिन कैदियों का जेल में व्यवहार अच्छा है, उन्हें ही पैरोल पर भेजा जाता है। साल में 84 दिन की पैरोल मिलती है। एक समय में 14, 21, 24 और 42 दिन तक की पैरोल मिलती है।
कोट:
मानसिक परेशानियों से मिलेगा छुटकारा
पैरोल पर जाने के लिए नियम में बदलाव किया है। जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की ओर से एक बार की गई वेरिफिकेशन तीन साल तक के लिए वैध रहेगी। कैदियों को हर बार नए आवेदन और नई वेरिफिकेशन की आवश्यकता नहीं रहेगी। इससे कैदियों को जो मानसिक परेशानी होती थी, वह नहीं होगी।
-एसआर मरडी, एडीजीपी, जेल विभाग।

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