
श्रीनगर। नगर में 388 वर्ष पूर्व स्थापित केशोराय मठ को बचाने के लिए प्रशासन तथा संस्कृति विभाग की ओर से पर्याप्त कोशिशें नहीं की गई। अब स्थिति यह है कि मठ के बचे अवशेष बचाने के लिए भी प्रशासन, संस्कृति विभाग और गढ़वाल विवि तक जहमत नहीं उठा रहा है।
अलकनंदा किनारे स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का केशोराय मठ डेढ़ फीट चौड़ाई के पत्थरों से निर्मित था। अधिकांश पत्थरों पर शानदार नक्काशी के नमूने थे। मठ के मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति की नक्काशी इस मठ के मुख्य आकर्षणों में से एक थी। प्रशासन ने जीवीके से सीमेंट से तैयार बड़े ब्लॉक डाले जाने के संदर्भ में बात की। कंपनी ने बड़े ब्लॉक के लिए रास्ता न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। अफसोस है कि मठ गिर जाने के बावजूद उसके अवशेष बचाने की जहमत तक प्रशासन, संस्कृति विभाग और यहां तक कि गढ़वाल विवि ने भी नहीं की।
– सिंचाई विभाग बचाव के उपाय कर रहा था। जीवीके से भी मदद मांगी गई थी, लेकिन रास्ता नहीं होने से वे सीमेंट के ब्लॉक उपलब्ध नहीं करा पाए। सिंचाई विभाग को बचे हुए अवशेष संभालने के निर्देश दिए हैं। – रजा अब्बास, उपजिलाधिकारी श्रीनगर।
– हमारे पास जो ब्लॉक उपलब्ध थे, वे रास्ते की समस्या के कारण वहां नहीं पहुंचाए जा सकते थे। प्रशासन के कहने पर पत्थर उपलब्ध करा दिए गए थे। – सत्यजीत खंडूड़ी, अभियंता जीवीके।
