केवल गेहूं और चावल के सहारे कैसे कटे जिंदगी

उत्तरकाशी। क्षीर गंगा में 16 जून की रात आई बाढ़ में तबाह हुए गंगोत्री राजमार्ग के प्रमुख यात्रा पड़ाव धराली में अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। हालात सामान्य हों भी कैसे, जब सरकार उनकी सुध ही नहीं ले रही है। अभी तक इस गांव में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। सीएम की घोषणा के अनुसार कुछ दिन पहले ग्रामीणों को 15-15 किलो गेहूं और चावल तो मिला, पर समस्या यह है कि इस गेहूं को पिसवाएं कहां? चावल पकाएं तो खाएं किससे? रोजमर्रा की जरूरत का सारा सामान खत्म हो गया। गंगोत्री हाईवे शीघ्र खुलने के आसार भी नहीं दिख रहे। ऐसे में सिर्फ गेहूं-चावल के भरोसे आखिर गांव वाले कब तक जियेंगे? यह स्थिति सिर्फ धराली में ही नहीं बल्कि सड़क से अलग-थलग पड़े भटवाड़ी क्षेत्र के सभी गांवों की है।
धराली बीते सालों में प्रमुख पड़ाव बनकर उभरा। यहां लकड़ी के बने होटल ठहरने के लिए पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करते हैं। 16 जून को क्षीर गंगा में आई बाढ़ सब तबाह कर गई। अब होटल, ढाबों और घरों में मलबा भरा पड़ा है। सरकार ने सुध नहीं ली तो ग्रामीण स्वयं पैसे इकठ्ठे कर जेसीबी की मदद से क्षीर गंगा में जमा मलबा साफ करा रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 15-15 किलो गेहूं और चावल गांववालों को मिल गया है। लेकिन जीने के लिए इसके अलावा भी कई चीजों की जरूरत होती है।
धराली से अस्सी किमी की दूरी जोखिम भरे रास्तों से पैदल तय कर उत्तरकाशी पहुंचे जयभगवान पंवार, भागवत, दुर्गेश पंवार आदि ने बताया कि गांव में खाने का तेल, मसाले, नमक, चीनी, चायपत्ती, साबुन, मोमबत्ती, मिट्टी तेल, माचिस, रसोई गैस आदि सामान भी खत्म है। गांव की प्रधान ममता पंवार के अनुसार गांव में अभी तक क्षति के आंकलन के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। प्रभावितों को गेहूं-चावल के अलावा कोई सहायता नहीं मिली।

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