
हरिद्वार। केदारनाथ में पूजा शुरू होने से धर्मजगत में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ संत खुश हैं तो अधिकतर नाखुश। संतों और धर्मज्ञों का मानना है प्रदेश सरकार को श्रद्धालुओं को केदारनाथ ले जाने का प्रयत्न करना चाहिए। बिना यात्री और श्रद्धालुओं के पूजा का कोई अर्थ नहीं होता।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि केदारनाथ में यात्रियों के दर्शन पर लगाया गया प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण है। जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल अपने साथियों के साथ पैदल मंदिर तक जा सकते हैं, तब यात्रियों पर प्रतिबंध का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा, निशंक के साथ करीब 100 कार्यकर्ता भी पैदल मार्ग से पहुंच गए। जाहिर है पैदल मार्ग दुरुस्त किया जाता तो यात्री पूजा का दर्शन कर सकते थे। जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने कहा कि केदारनाथ में पूजा का औचित्य तभी है जब श्रद्धालु भाग ले सकें। पौराणिक मठ-मंदिरों की रक्षा जरूरी है और नागरिकों के लिए मार्ग का निर्माण पूजा से पहले किया जाना चाहिए था। श्रीमहंत प्रेम गिरि, राज गिरि और श्रीमहंत विनोद गिरि ने पूजा का स्वागत करते हुए मांग की है कि तत्काल यात्रियों के लिए पैदल मार्ग खोला जाए। अभा संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने कहा कि पूजा के लिए नेताओं को नहीं, जनता को पहुंचना चाहिए। जब तक धर्मावलंबी नहीं जाएंगे, पूजा अधूरी रहेगी। कालिका पीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत ने भी कहा जब तक मार्ग दुरुस्त नहीं किए जाते, पूजा का औचित्य नहीं है।
