
सुबह-शाम भोले के भजनों से भक्तों को मोक्ष की राह दिखाने वाले तीर्थ पुरोहितों को शिवभूमि में मचे तांडव के बाद ठीक से मुक्ति भी नहीं मिल सकी। देशभर के लोगों को तर्पण का महत्व बताने वाले तीर्थपुरोहितों को काल ने समय से पहले ही तर्पण दे दिए।
जिसमें धर्म भी प्रकृति ने निभाया और रस्में भी कुदरत के अनुसार ही हुई, फर्क सिर्फ इतना था कि इस दफा मंत्रोच्चारण की गूंज नहीं बल्कि इंसानी चीखों में दबी संवेदनाओं ने आसमान गुंजायमान किया।
रुद्रप्रयाग जनपद के लमगौंडी, दिवली, भणीग्राम, फली, पसालत, ल्वानी, रुद्रपुर, गुप्तकाशी, फाटा, खड़िया, हाठ, उखीमठ एवं तिमाणा के कई तीर्थपुरोहित केदारघाटी में आई तबाही में गुम हो गए हैं, और कई के अंतिम संस्कार की गवाह अलकनंदा नदी बनी है।
100 लोगों के मारे जाने की पुष्टि
लमगौंडी निवासी आशीष सेमवाल ने बताया कि केदारनाथ में सदियों से पुरोहिती कर रहे अवस्थी, पोस्ती, तिवारी, शुक्ला एवं सेमवाल परिवार के तकरीबन 100 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि तकरीबन 200 लोग अभी लापता हैं। केदारनाथ में यात्रा सीजन के दौरान खाने-कमाने की जुगत में गए बडासू, जाल, तुणासी, चौमासी, बिडुला एवं बेडा समेत आसपास के अन्य गांवों के तकरीबन 200-250 घोडे़ खच्चर संचालक और डंडी कंडी वाले व्यवसायी गायब हैं जबकि तकरीबन 150 लोग अब तक मारे जा चुके हैं।
केदारघाटी में रेस्क्यू में जुटे आशीष का कहना है कि रास्ते पर हर जगह लाशों का अंबार लगा है।
घर पहुंचकर तोड़ा दम
रुद्रप्रयाग जनपद के लमगौंडी निवासी भूषण अवस्थी केदारनाथ में पंडिताई करते थे। केदारनाथ में आई आपदा के बाद भूषण चार दिन तक गायब थे। बुधवार को पैदल पहाड़ियों और घाटियों को भूखे-प्यासे नापते हुए भूषण केदारनाथ में मौत के तांडव को अपनी आंखों से चार दिन तक देखने के बाद सकुशल घर लौट आए थे, लेकिन शिवभूमि में बिखरी लाशों ने अंदर तक इतना डरा दिया कि दूसरी जिंदगी शुरू होने से पहले ही लौ बुझ गई।
पिता किशन अवस्थी ने बताया कि भूषण आपदा से बेहद डर गया था और घर पहुंचते ही उसने शाम को दम तोड़ दिया।
भूषण की मौत से परिवार सन्न है और लोग खौफजदा।
