केदारनाथधाम में आकर कर सकेंगे अपनों को याद

केदारघाटी की आपदा में मृत तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की याद में केदारधाम में एक स्मृति स्थल बनेगा। इसका निर्माण बदरी-केदार मंदिर समिति करवाएगी। इससे पहले केदारनाथ में शुद्धिकरण के बाद शांति पाठ का आयोजन होगा।

उत्तराखंड की पल-पल की खबर मिलेगी यहां

सैलाब से सैकड़ों यात्रियों की मौत के साथ ही मुख्य मंदिर के पूर्वी भाग को कुछ नुकसान हुआ है। वहीं मंदिर के चारों ओर बड़े पत्थरों के अलावा अब कुछ भी शेष नहीं है।

अभिलेख भी बह गए
श्री बदरी-केदार मंदिर समिति की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने बताया कि मंदिर में आए सैलाब से मंदिर समिति के भवन और कार्यालय अभिलेख बह गए हैं। मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने रविवार को मंदिर समिति कार्यालय कारगी दून में हुई बैठक में केदारधाम में हुए नुकसान की रिपोर्ट सौंपी है।

रिपोर्ट में कहा है कि सैलाब के मुख्य मंदिर से टकराने से मुख्य मंदिर हिल गया था। जबकि मंडप एवं गर्भ गृह में भगवान के ज्योर्तिलिंग के चारों ओर रेत भरी है। जिससे भगवान का ज्योर्तिलिंग एवं सभा मंडप स्थित वीरभद्र की मूर्ति का केवल ऊपरी भाग दिखाई दे रहा है। जबकि दक्षिण द्वार की विशाल मूर्ति अपने स्थान पर है व पूर्व की तरफ भैरव मौजूद हैं। �

दरवाजा न टूटता तो जिंदा न होते तीन सौ लोग
श्री बद्री-केदार मंदिर समिति की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने कहा कि 16 व 17 जून को आए सैलाब में मंदिर के कार्याधिकारी अनिल शर्मा खुद इस सैलाब में फंसे थे। हालत यह थी कि सभा मंडप और गर्भगृह में खडे़ यात्रियों की कमर और फिर गले तक पानी का स्तर बढ़ गया था।

सभा मंडप में लक्ष्मीनारायण विग्रह वाला दरवाजा न टूटता तो यहां फंसे करीब तीन सौ लोग जिंदा न बचते। कई पौराणिक मूर्तियों को नुकसान श्री केदारनाथ और इसके अधीनस्थ मंदिरों में देवी देवताओं की पौराणिक 54 मूर्तियां हैं। सैलाब से कुछ मूर्तियों के क्षतिग्रस्त और बहने का अंदेशा है।

मंदिर समिति के अनुसार सैलाब में आए मलबे को हटाए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मंदिर में पांडवों की मूर्तियों के अलावा कई प्राचीन मूर्तियां हैं।

इन देवी-देवताओं की पौराणिक मूर्तियां थीं
श्री केदारनाथ भगवान का ज्योतिर्लिंग, पार्वती की मूर्ति, पार्वती के पास गणेश की मूर्ति, नंदीगण, सभा मंडप में धर्मराज युधिष्ठिर की मूर्ति, अर्जुन की मूर्ति, द्रौपदी, महाबली भीम, चतुर्भुज भगवान, सहदेव, नकुल, परशुराम, हनुमान, जय-विजय, नीलकंठ महादेव का लिंग, श्री भैरवनाथ, उदक-कुंड के अंदर मूर्ति, भैरवनाथ की मूर्तियां, उदक-कुंड के भीतर की मूर्ति।

मंदिर समिति के 16 कर्मी हैं लापता
अनीता जीना, सुनीता शुक्ला, दिवाकर चमोली, चंद्रशेखर सेमवाल, राजेंद्र तिवारी, रुद्रीनाराण भट्ट, गोविंद पटवाल, परशुराम सेमवाल, सतीश बमोला, सर्वेश्वर नौटियाल, आशीष खंडूरी, चंद्रप्रकाश त्रिवेदी, मुरली सिंह बजवाल, सुनील कुंवर, कैलाश चंद्र, कुलदीप रावत।

श्री केदारनाथ मंदिर के दोनों ओर गहरे गड्ढे हो गए हैं, मंदिर के� पिछले भाग में बडे़ बोल्डरों से टक्कर लगी है, इससे मंदिर की दीवार को नुकसान हुआ या नहीं यह बोल्डर हटाने के बाद ही पता लग सकेगा। मंदिर में तीन फुट से बड़ी मूर्तियां सुरक्षित हैं। मलबा हटाने के बाद कितना नुकसान हुआ है स्थिति साफ हो सकेगी।

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