
चंबा। आठवीं कक्षा के बाद भी कस्तूरबा गांधी विद्यालय के बच्चों को निशुल्क शिक्षा मुहैया करवाए जाने की कवायद शुरू की गई है। प्रदेश सरकार यहां से पासआउट हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई आगे जारी रखने की योजना बनाने जा रही है। इससे गरीब परिवार से संबंध रखने वाले बाल आश्रम में रह रहे बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहूलियत मिलेगी। प्रदेश भर में करीब 21 कस्तूरबा गांधी विद्यालय चल रहे हैं। इन स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है। आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इनके लिए आगे की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं होती है। इसके चलते कई बच्चे आगे की शिक्षा जारी नहीं रख पाते हैं।
अब शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश भर के केजीवी स्कूलों से वर्ष 2009-10, 10-11 और 2011-12 के छात्रों की सूची मांगी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन तीन साल में पास आउट हुए बच्चों की स्थिति कैसी है। संबंधित स्कूल के छात्रों का विवरण एकत्रित होने के बाद प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। संबंधित स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि इलाके के आसपास के स्कू लों के साथ संपर्क करके केजीवी में शिक्षा ग्रहण कर चुके छात्रों का पता लगाया जाए।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि केजीवी के बच्चों के लिए आठवीं कक्षा के बाद वोकेशनल कोर्स या फिर अन्य प्रोफेशनल कोर्स शुरू करवाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके चलते छात्रों की चार साल पहले की डिटेल मांगी गई है। छात्रों की संख्या के आधार पर ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
वोकेशनल कोर्स के प्रोजेक्ट ऑफिसर विकास महाजन ने बताया कि संबंधित स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी किए गए हैं कि आठवीं पास कर चुके कस्तूरबा गांधी स्कूल के छात्रों का पता लगाया जाए। इस जानकारी के आधार पर इन स्कूलों के पासआउट छात्रों के लिए उचित योजना बनाई जा सकेगी।
जिले में कस्तूरबा गांधी विद्यालय
जिले में मैहला, करीयां, तीसा और किलाड़ में कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं। ये सभी विद्यालय बालिकाओं के लिए हैं। प्रदेश के कुछ जिलों में बाल आश्रम भी हैं। इन आश्रमों में बच्चों के लिए खाने-पीने और रहने की निशुल्क व्यवस्था होती है। इन आश्रमों में गरीब परिवार के बच्चों को दाखिला दिया जाता है। उनकी स्कूल की फीस भी आश्रम अकाउंट से दी जाती है। इसके अलावा पठन-पाठन सामग्री का खर्चा आश्रम की ओर से उठाया जाता है।
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