
शिमला। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के हलफनामे को शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के परिजनों ने चुनौती दी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय की एपेक्स कोर्ट बैंच के समक्ष सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया के अधिवक्ता ने दलील दी कि भारत सरकार ने मौजूदा सबूत के बिना ही अपना जवाब दायर किया है। इस पर न्यायमूर्ति आरएम लोढा की अध्यक्षता वाले एपेक्स कोर्ट बैंच ने सभी पार्टियों को अपने-अपने पक्ष स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं और इस मामले को फाइनल डिस्पोजल के लिए रख दिया है। यह जानकारी अधिवक्ता अरविंद शर्मा ने पुष्ट की है।
अरविंद शर्मा ने कहा है कि भारत सरकार ने अपने हलफनामे में वर्ष 1999 का ही स्टैंड स्पष्ट किया है, जबकि मौजूदा एविडेंस यह है कि पाकिस्तान के एक सैनिक ने सौरभ कालिया के बेरहमी से किए गए कत्ल की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, उसमें इस तथ्य को स्पष्ट नहीं किया गया है। सरकार ने जवाब में कहा है कि शिमला समझौते के तहत इसे वार क्राइम नहीं माना जा सकता है। इसलिए इसे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में नहीं भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी पार्टियों को अपनी प्लीडिंग पूरा करने को कहा है। इसे अंतिम डिस्पोजल को लगा दिया है।
