कृषि की तर्ज पर मिले लघु उद्योगों को ऋण

बद्दी (सोलन)। लघु उद्योग भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हिमाचल के उत्तर भारत के प्रभारी विनोद जैन ने कहा कि कृषि को सस्ती दरों पर मिलने वाले ऋण की तर्ज पर लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों को भी ऋण मिलना चाहिए।
किसानों को सरकार की ओर से कृषि ऋण चार फीसदी ब्याज की दर पर मिलता है लेकिन वही ऋण लघु उद्योग संचालकों को 15 फीसदी ब्याज की दर पर मिल रहा है जो काफी अधिक है। इसी कारण से लघु उद्योग दम तोड़ रहे हैं और समय रहते इस बात की चिंता करना जरूरी है अन्यथा देश के साथ-साथ हिमाचल के उद्योग तालाबंदी करने पर मजबूर हो जाएंगे।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लघु उद्योग देश में सबसे अधिक बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में सफल हुए हैं। लघु उद्योग भारती का उद्देश्य है सभी के हाथ को काम मिले। देश की प्रगति में हर नौजवान भागीदार हो। कृषि व निर्यात को बढ़ावा देना है। 25 अप्रैल 1994 को लघु उद्योग भारती की स्थापना हुई। वर्तमान में 26 राज्यों में इसकी 190 इकाइयां हैं। लघु उद्योग भारती देश के 22 सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में भागीदारी निभा रही है।
उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर राज समाप्त करवाना, बिजली की उपलब्धता और वितरण, कच्चे माल की खरीद, बेहतर प्रबंधन, महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने, व्यापार मेले व प्रदर्शनियां लगा तथा उत्पादकता में सुधार लाने के लिए मार्गदर्शन कराने के लिए लघु उद्योग भारती संघर्षरत है। उन्होंने सभी उत्पादकों को एकजुटता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि अगर वह एक जुट होंगे तभी वह अपने इन मांगों को पूरा करने में सफल रहेंगे।
लघु उद्योग भारती स्थानीय औद्योगिक संगठनों से तालमेल बैठा कर राज्य व केंद्र स्तर पर निराकरण के निरंतर प्रयास जारी है।
इस मौके पर प्रदेशाध्यक्ष तेजेंद्र गोयल, महासचिव एनपी कौशिक, विनोद खन्ना, विक्रम बिंदल, राजीव कंसल, रणेश राणा, हेमराज चौधरी, दीपक कुश्वाहा, अनिल मलिक, सुरेंद्र जैन व बलराम अग्रवाल सहित कई उद्यमी उपस्थित थे।

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