
काशीपुर। उत्तराखंड की ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा का शुभारंभ 29 अगस्त को इड़ाबधानी गढ़वाल और कुमाऊं में चार सितंबर को नंदादेवी मंदिर अल्मोड़ा में होगा। इसका शुभारंभ राजा करन चंद (केसी सिंह बाबा) करेंगे। 6 सितंबर को दोनों राजजातों का मिलन नंदकेशरी में होगा। 15 सितंबर को सुतोली घाट में राजजात के आगे-आगे चल रहे चार सींगों वाले खाडू को छोड़ा जाएगा। इसी के साथ 280 किलोमीटर लंबी धार्मिक यात्रा का समापन हो जाएगा।
यात्रा के प्रवक्ता मनोज वर्मा और सांस्कृतिक संयोजक मनोज सनवाल तथा कुमाऊं के राजा करन चंद (सांसद केसी सिंह बाबा) ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यात्रा का शुभारंभ गढ़वाल में 29 अगस्त को परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना के साथ ग्राम इंडावधानी में कुंवर राकेश और राजगुरु भुवन चंद्र नौटियाल राजजात यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यात्रा कसुवा, सैम, कोटी, भतौली, कुलसानी चेपड्यू होकर 6 सितंबर को नंद केशरी पहुंचेगी। उधर नंदा देवी मंदिर अल्मोड़ा में 26 से 28 सितंबर तक मंदिर में योग माया का अवतरण पूजा-अर्चना होगी। 30 सितंबर से 2 अगस्त तक नंदा देवी की छतौली की प्राण प्रतिष्ठा और 3 अगस्त को नंदादेवी की छतोली का नगर भ्रमण होगा।
यात्रा वाहनों से माला, छानी, बैजनाथ, कोटभ्रामरी होकर 6 सितंबर को नंदकेशरी पहुंचकर गढ़वाल से आई पैदल राजजात यात्रा में मिल जाएगी। वर्मा ने बताया कि यहां से कुमाऊं, गढ़वाल की राजजात यात्रा पैदल अंतिम पड़ाव सुतोली घाट के लिए रवाना होगी। मान्यता के अनुसार सुतोली घाट में चार सींगों वाला खाडू जंगल में जाकर अदृश्य हो जाएगा। यहीं से यात्रा का समापन हो जाएगा।
