किसी राजनेता को नहीं जनता की परवाह

उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल और पांगी घाटी के लोगों को राहत ने नाम पर किसी भी राजनीतिक पार्टी ने पहल नहीं की है। यहां बर्फ की कैद में जकड़े कई मरीज और अन्य राहत के लिए तड़प रहे हैं। लेकिन, इन लोगों को राहत पहुंचाने के बजाय पार्टियां राजनीति करने में मशगूल हैं।
यहां न जाने कितने लोग इलाज नहीं मिलने से मौत के मुंह में चले गए हैं। इन दिनों दुर्गम क्षेत्र मयाड़ घाटी के तिंगरेट गांव में चिची लामो हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। उसके लिए सरकार के मसीहा जब मेहरबान होंगे, तभी इलाज नसीब होगा। भाजपा के लोग हेलीकॉप्टर की उड़ान नहीं होने से आवाज बुलंद कर रहे हैं तो वर्तमान सरकार के कुछ नेतागण उड़ान में देरी को लेकर मौसम का हवाला दे रहे हैं। सर्दी के मौसम में हेलीकॉप्टर के इंतजार में वर्ष 2006 में आईपीएच केलांग में रहे बंजार निवासी रूप चंद, फरवरी 2007 में बरगूल निवासी धर्मपाल, मार्च 2007 में कृषि विभाग केलांग में तैनात रहे जोगिंद्र नगर निवासी रूप लाल, अप्रैल 2008 में छालिंग गांव की सोनदेई, दिसंबर 2011 में जाहलमा निवासी लाल चंद, जबकि इस वर्ष जनवरी में मड़ग्रां के चारू निवासी रामानंद भी उड़ाने के इंतजार में इस दुनिया से रुखसत हो गए। न जाने और कितने लोग हेलीकॉप्टर के इंतजार में अपने प्राण गवां चुके हैं। राजनेताओं को यहां की भौगोलिक परिस्थितियां मालूम होने के बावजूद घाटी की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं है। घाटीवासी सुख राम, विजय चंद, वीर सिंह और प्रेम सिंह ने बताया कि हर सर्दी के मौसम में शीतकालीन हेलीकॉप्टर सेवा सियासत की भेंट चढ़ जाती है। यहां की जनता पक्ष-विपक्ष के सियासी मुद्दों में ही पिसती जा रही है।

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