किसी तहखाने सेे कम नहीं मिनी सचिवालय

ऊना। जिला ऊना का मिनी सचिवालय किसी तहखाने से कम नहीं है। सचिवालय के बाहर गंदगी के ढेर लगे हैं। नालियों में पानी रुका हुआ है। ऐसे में अधिकारी संपूर्ण स्वच्छता अभियान के दावे कैसे कर सकते हैं? परिसर सहित छतों पर घास उगी है, पंखे धूल फांक रहे हैं। रिकार्ड इधर-उधर बिखरा पड़ा है? ऐसा लगता है जैसे यहां कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं बैठता, बल्कि अरसे से बंद पड़ा कोई तहखाना है।
मंगलवार सुबह : 11.30 बजे। अमर उजाला की टीम ने मिनी सचिवालय का दौरा किया। सचिवालय के बाहर बेतरतीब ढंग से दोपहिये वाहन खडे़ थे। इससे लोगों को परेशानी हो रही थी। यहीं पर डीसी, एडीसी, एसीटूडीसी, एसडीएम, एसपी, एएसपी, डीएसपी, डीपीआरओ समेत अन्य अधिकारी बैठते हैं। साथ में ही कोर्ट परिसर भी है। यहां जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीजेएम समेत अन्य जज भी यहीं बैठते हैं। मिनी सचिवालय का पूरा परिसर दोपहिया वाहनों से घिरा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि यह कोई पार्किंग स्थल हो। जब टीम तहसीलदार कार्यालय के आगे पहुंची तो वहां स्टांप पेपर बिक रहे थे। लोगों की लंबी कतार लगी थी।

नहीं मिल रहे 5-10 रुपये के स्टांप
तहसीलदार कार्यालय परिसर में स्टांप लने पहुंचे ऊना के मनीष कुमार, लाल सिंगी के रवि कुमार, अंब से आए अशीष कुमार, झलेड़ा के सौरव सेखड़ी, झलेड़ा पंचायत के उपप्रधान जसवीर सिंह का कहना है कि वह सुबह से स्टांप पेपर लेने के लिए लाइन में लगे हैं। जब बारी आई, तो पता चला कि 100 से 150 रुपये के स्टांप पेपर ही नहीं हैं। इतनी अधिक मात्रा में पांच-दस रुपये के स्टांप पेपर देने को कोई तैयार नहीं। जब टीम ने स्टांप विक्रेता से स्टांप पेपरों के बारे में पूछा, तो जवाब मिला सिर्फ पांच और दस रुपये के ही स्टांप पेपर हैं। सौ रुपये, दो सौ रुपये के स्टांप पेपर पीछे से ही नहीं मिल रहे हैं।

तीन दिन से नहीं बना बोनाफाइड
देहलां से आए कुलविंद्र सिंह का कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से तहसील कार्यालय में बोनाफाइड के लिए चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक नहीं बन पाया।

तहसील आफिस के बाह फाइलों के ढेर
टीम जब तहसीलदार के दफ्तर के पास पहुंची तो कार्यालय के बाहर फाइलों के ढेर लगे हुए थे। इन पर धूल-मिट्टी जमी हुई थी। सचिवालय की नालियों में पानी रुका हुआ था। जैसे कई दिनों से यहां सफाई ही नहीं हुई। सुरक्षा शाखा की ओर प्रवेश किया, तो वहां के दरवाजे टूटे हुए थे। लाइसेंस ब्रांच के आसपास उगी झाड़ियाें से सचिवालय जंगल की तरह लग रहा था।

उखड़ गए दरवाजे-खिड़कियां
मिनी सचिवालय में कई कमरों के दरवाजे और खिड़कियां उखड़ गए हैं। खिड़कियों के आसपास पेड़ उगे हैं। मिनी सचिवालय किसी भूत बंगले से कम नहीं लग रहा है। अंदर कई जगह फर्श फट गया है। जिला खाद्य एवं आपूूर्ति नियंत्रक कार्यालय में कर्मचारियों ने बताया कि बरसात में दफ्तर तालाब बन जाता है। दफ्तर तक पहुंचने के लिए गैलरी में ईंटें रखनी पड़ती हैं।

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