
चंबा। जिला पुस्तकालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ज्ञान का भंडार कहे जाने वाले पुस्तकालय में ज्ञानवर्द्धक किताबों की संख्या बढ़ने के बजाय घट रही है। नई किताबें का संकलन में भी नहीं हो रहा है। हाल यह है कि लाइब्रेरी में करीब तीन माह से 11 प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पत्रिकाएं आना बंद हो गई हैं। किताबों की कमी के चलते लाइब्रेरी बेजान लगती है।
लाइब्रेरी में पहले 18 विभिन्न प्रकार की पत्रिकाएं आती थीं। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पत्रिकाएं भी होती थी। तीन माह से केवल सात पत्रिकाएं ही लाइब्रेरी में आ रही हैं। इस कारण लाइब्रेरी जाने वाले पाठकों को प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें पढ़ने को नहीं मिल रही हैं। इस कारण लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए जाने वाले पाठकों को पुराने पत्रिकाएं पढ़नी पड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि लाइब्रेरी में वर्ष 1995-2000 के बीच के संस्करण पड़े हुए हैं। वर्ष 1959 में बनी इस लाइब्रेरी में 10 साल से पुरानी किताबें पड़ी हुई हैं, मगर नए संस्करण नहीं आ रहे हैं। इससे लाइब्रेरी में जाने वाले लोगों को बीते तीन-चार वर्षों की चर्चित पुस्तकें पढ़ने को नहीं मिल रही हैं। वर्ष 2005 में कुछ नए संस्करण मंगवाए गए थे। इसके अलावा कुछ नया नहीं है। लाइब्रेरी की समस्या को लेकर लाइब्रेरी के कुछ सदस्यों ने उपायुक्त संदीप से भी मुलाकात की थी और लाइब्रेरी की दशा सुधारने की मांग की थी। उपायुक्त ने उन्हें आश्वासन भी दिया था। इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। हालांकि देखा जाए तो जिला पुस्तकालय में पाठकों की अभी कम नहीं हुई है। लाइब्रेरी में वर्तमान में 300 सदस्य पंजीकृत हैं और हर समय लाइब्रेरी हाल भरा रहता है। लेकिन किताबों का संकलन बढ़ाया जाता तो पाठकों का जुड़ाव बढ़ता।
कोट
हमारे पास पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है। जितना बजट पहुंचता है, उसी से लाइब्रेरी के सदस्यों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने को लाइब्रेरी प्रबंधन प्रयासरत रहता है
