काश्तकारों ने गायों को विकास भवन में बांधा

अल्मोड़ा। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों को दी गई गायों की खरीद का मामला तूल पकड़ गया है। भैंसियाछाना के काश्तकार पांच गायों को ट्रक में लादकर विकास भवन ले आए और इन गायों को परिसर में स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में बांध दिया। उन्होंने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य विकास अधिकारी से मिलकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दूसरी तरफ पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
भैंसियाछाना के डुंगरी गांव निवासी काश्तकार जीवन सिंह पटेल का आरोप है कि पशुपालन विभाग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पांच गायें खरीदवाईं। इसके लिए प्रति गाय 15 हजार का अंशदान भी लाभार्थी से जमा करवाया। विभाग ने गायों को उन्नतशील नस्ल की बताते हुए प्रतिदिन दस लीटर दूध मिलने का भरोसा दिया था। काश्तकारों का आरोप है कि क्षेत्र में तैनात पशु चिकित्सक ने घटिया नस्ल की और नाममात्र का दूध देने वाली गाय उपलब्ध कराईं। पशुपालकों की शिकायत पर विभाग ने जांच कराने का आश्वासन दिया था लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नाराज ग्रामीण गायों को ट्रक में लाद कर बुधवार को विकास भवन पहुंच गए। उन्होंने सभी गायों और उनकी बछिया, बछड़ों को परिसर के पहली मंजिल में स्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय के दरवाजे पर बांध दिया।
सीडीओ ज्योति नीरज खैरवाल ने पशुपालकों से वार्ता की। उन्होंने जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया और पशुओं समेत घर वापस लौटने को कहा लेकिन पशुपालक नहीं माने। ग्रामीणों के विकास भवन में जानवरों के साथ धमकने से सीवीओ कार्यालय के बाहर बांध देने से अफरातफरी मची रही। इधर बाड़ेछीना की पशु चिकित्साधिकारी डा. चित्रा धीमान ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि काश्तकार जीवन सिंह पटेल ने यह गायें व्यक्तिगत तरीके से खरीदी हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें विभाग ने कोई गाय नहीं खरीदवाई है। उनका कहना है कि जीवन सिंह का इस योजना के लिए चयन ही नहीं हुआ था। उनका कहना है कि वह षड्यंत्र के तहत झूठे आरोप लगा कर विभाग तथा उनकी छवि धूमिल कर रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर जीवन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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