
कारोबारी के भाई की तलाश में अज्ञात नकाबपोश!
परवाणू (सोलन)। अज्ञात नकाबपोशों ने टोटल हेल्थ केयर मेडिसिन कंपनी परवाणू के गेट में पहुुंचकर दहशत फैलाने की कोशिश की। इसी कंपनी के मालिक को एक करोड़ की चौथ न देने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। कारोबारी ने इसकी लिखित सूचना परवाणू थाना में दी है।
शिकायत में कंपनी के मालिक सुशील कुमार ने कहा कि शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे बाइक में सवार दोनो नकाबपोश गेट पर पहुंचे और कंपनी के गेट पर लगी छोटी खिड़की के पास उसके भाई पवन कुुमार गोयल का पता पूछने लगे। नकाबपोशों ने बताया कि वह सिरमौर से आए हैं। इसके बाद परवाणू में सेक्टर चार पर कंपनी के मालिक की कोठी के बारे में पूछताछ करने लगे। जब चौकीदार ने कंपनी मालिक के बड़े भाई से बात करवाना चाही तो दोनों नकाबपोश बाइक यह कहकर बाइक घुमा कर ले गए कि पवन कुमार का पता वह स्वयं ढूंढ लेंगे। हमने कोठी में निशान तो लगा दिया है। वहीं जब ‘अमर उजाला’ की टीम सेक्टर चार स्थित कोठी नंबर 18/19 पर पहुंचे तो उस तरह के निशान वहां सभी कोठियों में मौजूद थे। यह निशान काली स्याही से लिखे गए हैं। किसी सर्वे के प्रतीत होते हैं। उधर, डीएसपी परवाणू सुशील शर्मा ने कहा कि पुलिस को शिकायत मिली है। अगर जरूरत पड़ी तो सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी।
शिकायतकर्ता गंभीर नहीं!
परवाणू थाना में शिकायत करने वाले कंपनी के मालिक ने थाने में औपचारिकता मात्र पत्र सौंपा है। जिसमें किसी तरह की सिक्योरिटी नहीं मांगी है। पुलिस के मुताबिक यह गंभीर मामला है। रात को ही पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी, लेकिन सूचना शनिवार दोपहर बाद मिल रही है। साथ ही कालका थाना में एफआईआर दर्ज होने के तीन दिनों बाद थाना परवाणू में सूचना दी जा रही है।
यह है मामला
सुशील कुमार के घर के बाहर लेटर बाक्स में कंप्यूटर पर टाइप किया हुआ एक पत्र और दो कारतूस मिले थे। पत्र भेजने वाले ने खुद को पुजारी गैंग का सदस्य बताते हुए उनकी जान की सलामती के बदले एक करोड़ की चौथ मांगी थी। पत्र और कारतूस एक लिफाफा में था। उस लिफाफे पर एक ओर सिर्फ गोयल लिखा था और दूसरी ओर पुजारी इंटरप्राइजेज लिखा हुआ था। इस पत्र में ने कोई स्टांप, न हस्ताक्षर और न ही एड्रेस लिखा है। चौथ मांगने वाले ने कहा था कि वह यदि यह रकम दे देते हैं तो उसका गैंग अन्य गैंगों से अगले पांच साल तक उनकी सुरक्षा करेगा। हालांकि रकम पहुंचाने के तरीके और कब व कहां भेजना है, इसके बारे में पत्र में नहीं लिखा गया था।
