
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद रशीद मसूद को 23 साल पुराने मेडिकल सीट घोटाले में दोषी करार देते हुए दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने चार साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले का मसूद के राजनीतिक भविष्य पर असर हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक,संसद सदस्यता गंवाने वाले वह पहले सांसद होंगे। मसूद राज्यसभा से सांसद हैं। सजा सुनाए जाने के साथ ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया है और अब वह जेल भेज दिए जाएंगे। धोटाले के समय त्रिपुरा के आयुक्त रहे गुरदयाल सिंह को भी चार साल की सजा सुनाई गई है। इस मामले दोषी पाए गए छात्रों को 1-1 साल की हुई है।
19 सितंबर को सीबीआई की विशेष अदालत ने मसूद को भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों का दोषी करार दिया था। रशीद को जिन धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था, उसके आधार पर उन्हें अधिकतम 7 साल कैद की सजा हो सकती थी। रशीद को ज्यादा सजा से बचाने के लिए उनके वकील ने उनकी खराब सेहत का हवाला दिया। उनके वकील ने अदालत को बताया था कि रशीद बेहद बीमार हैं, उन्हें हार्ट डिसीज है और साथ ही वह डायबिटीज से भी पीड़ित हैं। जिसके चलते उन्हें रोजाना इन्सुलिन की जरुरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि रशीद को कुल 80 तरह की दवाईयां लेनी पड़ती हैं।
मसूद पर केंद्र की वीपी सिंह सरकार के समय केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए मेडिकल साइंसेज कोर्स में प्रवेश में हुई गडबडिय़ों का आरोप है। उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले मे जनप्रतिनिधि कानून की धारा आठ-चार को असंवैधानिक घोषित कर दिया है।
ऐसे ही एक अन्य चारा घोटाला मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव के दोषी पाये जाने के बाद उनकी संसद सदस्यता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। रांची की सीबीआई की विशेष अदालत अगर तीन अक्टूबर के फैसले मे उन्हें दो या इससे अधिक समय की सजा सुनाती है तो उनकी लोकसभा की सदस्यता समाप्त हो जायेगी।
