कांग्रेस-बनाम-कांग्रेस’ हुई हैंडबाल की जंग!

बिलासपुर। सत्ता परिवर्तन के बाद खेल संघों पर कब्जा करने का ‘रिवाज’ अब आम हो चुका है। इस मामले में जोर-आजमाइश सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच होती है, लेकिन हैंडबाल संघ एक अपवाद बन गया है। यहां सत्ता पक्ष के बीच ही टकराव की नौबत पैदा होने से वर्चस्व की जंग रोचक हो उठी है।
प्रदेश में खेल संघों पर कब्जे के लिए उठापटक की ‘परंपरा’ काफी समय से चली आ रही है। इसी ‘परंपरा’ के अनुरूप भाजपा कार्यकाल में मौजूदा राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने हैंडबाल संघ की कमान संभाली थी। उनकी अगुवाई वाली कार्यकारिणी का कार्यकाल गत 12 सितंबर तक था। इस अवधि में प्रदेश के खिलाड़ियों ने कई मेडल भी जीते, लेकिन गत विस चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद खेल संघों में बदलाव की ‘परंपरा’ एक बार फिर से निभाई गई। इसके तहत गत फरवरी में बिलासपुर के विधायक बंबर ठाकुर की अगुवाई में नई कार्यकारिणी बनी। बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर इसके मुख्य संरक्षक बनाए गए।
ताजा घटनाक्रम में हैंडबाल संघ की एक और कार्यकारिणी बनी है। नड्डा की अगुवाई वाली कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने पर गत 12 सितंबर को ऊना में संपन्न चुनाव में सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा संघ के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए। वह कांग्रेस के एसोसिएट मेंबर भी हैं। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री को मुख्य संरक्षक, जबकि सीएम वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह को संरक्षक बनाया गया। मामले से जुड़ा रोचक पहलू यह है कि इस कार्यकारिणी के साथ ही गत फरवरी माह में बनी कार्यकारिणी भी सत्ता पक्ष से ही संबंधित है। ऐसे में ‘परंपरा’ के विपरीत एक ही परिवार में उभरी गुटबाजी से वर्चस्व को लेकर टकराव के आसार पैदा हो गए हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, यह साफ होने में अभी कुछ समय लगेगा। अलबत्ता, इसके चलते हैंडबाल खिलाड़ी फिलहाल असमंजस में हैं।

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