
धर्मशाला। सांसद डा. राजन सुशांत के एकाएक सक्रिय होने के बाद प्रदेश के सबसे बड़े संसदीय क्षेत्र कांगड़ा-चंबा में सियासी हलचल शुरू हो गई है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व से छत्तीस का आंकड़ा लेकर चल रहे सुशांत एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनकी पार्टी नेताओं से अनबन और निलंबन के चलते पार्टी इस बार नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है। लिहाजा दूसरी पंक्ति के दावेदार नेताओं में सुगबुगाहट बढ़ गई है।
कांगड़ा भाजपा में लोकसभा के दोवदारों में शाहपुर से विधायक सरवीण चौधरी, पूर्व मंत्री किशन कपूर, एचआरटीसी के पूर्व उपाध्यक्ष डा. राजीव भारद्वाज और घनश्याम शर्मा जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। एक खेमे ने तो पालमपुर स्थित भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शांता कुमार के गृह यामिनी में भी दस्तक दी है। मंगलवार को पेंशनर्स एवं कर्मचारी कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष घनश्याम शर्मा के समर्थकों ने इस बाबत शांता कुमार से मुलाकात की है। हालांकि घनश्याम पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समर्थकों में गिने जाते हैं। लेकिन माना जा रहा है कि शांता की सहमति के बिना कांगड़ा में लोस प्रत्याशी की डगर आसान नहीं होगी। गुटीय संतुलन के लिहाज से देखा जाए तो घनश्याम शर्मा और सरवीण चौधरी धूमल खेमे से ताल्लुक रखते हैं, जबकि किशन कपूर और डा. राजीव भारद्वाज शांता कुमार के प्रबल समर्थक हैं। इसी तरह सांसद राजन सुशांत भी शांता कुमार के हमकदम रहे हैं। बीते रोज फतेहपुर में सांसद राजन सुशांत के तेवर भी इस ओर इशारा करते हैं कि वे पार्टी में पुनर्स्थापन के प्रयास में हैं। उनका कहना है कि वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और पार्टी से दावेदारी के उनके हक को कोई नहीं छीन सकता।
वहीं, घनश्याम शर्मा का कहना है कि वह एनजीओ के माध्यम से लगातार छह बार कांगड़ा जिला का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पूर्व मंत्री किशन कपूर और सरवीण चौधरी के मुताबिक उनके लिए हाईकमान के जो आदेश होंगे, वे सर्वोपरि हैं।
