कांगड़ा में ढूंढे नहीं मिल रहे देसी आम

डरोह (कांगड़ा)। फलों के राजा आम का स्वाद इस बार फीका पड़ गया है। लोगों को इस बार देसी आम बाजारों में ढूंढे नहीं मिल रहा है। इन दिनों इलाके में देसी आम की भरमार रहती थी। हर गांव में देसी आम की इतनी फसल होती थी कि लोग बरसात के दिनों में इसे बाजारों में बेचते थे। लेकिन इस बार वर्षों पुराने आमों के पेड़ खाली खड़े हैं। लोगों को अचार और चटनी के लिए भी आम उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
लोगों की कमाई का साधन होने के साथ-साथ देसी आम कांगड़ा घाटी में कई बड़ी अचार फैक्टरियों के लिए भी सप्लाई होता है। फसल न होने के कारण इस मर्तबा आम का अचार बाजार में कम ही दिखेगा। क्षेत्र में देसी आम का कारोबार करने वाले लोगों का धंधा भी इस वर्ष बंद है। सुलह विधानसभा क्षेत्र आम व लीची की फसल के लिए पूरे जिला कांगड़ा में जाना जाता है। जिले में नूरपुर क्षेत्र के बाद सुलह का नाम दूसरे पायदान पर है, लेकिन इस बार इस सारे इलाके में देसी आम ढूंढने पर भी नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के व्यापारी राम लाल, बेनी प्रसाद, चूहा राम, कमल कुमार, अनिल कटोच, पंकज कुमार, देश राज, सुरेश चंद, हिमाल सिंह, बख्शी राम, विनय कुमार, श्रवण, रूप चंद, प्यारे लाल आदि का कहना है कि इस बार क्षेत्र में देसी आम बिलकुल भी नहीं मिल रहा है। लीची की फसल भी बहुत कम है। लोगों के बगीचों में दशहरी आम भी बहुत कम है। इलाके के बागवान भी इस बार अपनी नकदी फसल आम व लीची को लेकर चिंतित हैं।
उधर, इलाके में कई अचार फैक्टरियों के मालिकों का कहना है कि हर वर्ष इस समय उनके पास भारी मात्रा में देसी आम अचार बनाने के लिए उपलब्ध होता था। लेकिन इस मर्तबा कच्चा या पक्का किसी भी तरह का आम देखने को भी नहीं मिल रहा।

Related posts