कांगड़ा किला फतह करने को तिकोनी लड़ाई

शिमला। हिमाचल में यदि किसी संसदीय सीट पर तिकोना मुकाबला है तो वह कांगड़ा है। भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार और कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र कुमार के बीच भाजपा के बागी और आम आदमी पार्टी प्रत्याशी राजन सुशांत फंस गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजन सुशांत जितने वोट लेंगे, उसका ज्यादा नुकसान किसे होगा? यहां चुनाव महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे राष्ट्रीय मुद्दों और राज्य की कांग्रेस सरकार के काम पर लड़ा जा रहा है।
इस बार 12,58,601 वोटर इस सीट के सांसद पर अपना फैसला सुनाएंगे। भाजपा ने कांगड़ा-चंबा में अपने सबसे मजबूत चेहरे शांता कुमार पर दांव खेला है। शांता ने इस सीट पर उतरने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर के सभी लोगों को साथ लिया है। शांता के साथ उनकी शांत छवि और लम्बा राजनीतिक अनुभव है। भाजपा में भी उनकी अगुवाई वाला खेमा अस्तित्व की जंग लड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में मात खाने के बाद अब लोकसभा चुनाव के बहाने सारा खेमा एकजुट हुआ है। उनके समर्थक उन्हें मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी प्रोजेक्ट कर रहे हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस ने ओबीसी वोटरों वाली इस सीट पर ओबीसी से ही चंद्र कुमार को ही मैदान में उतारा है। उनके साथ राज्य की कांग्रेस सरकार है। वह ओबीसी कार्ड से 2004 में शांता को पटखनी दे चुके हैं। कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 11 विधायक इस सीट पर हैं। 2 निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के साथ हैं। भाजपा के पास महज 4 विधायक हैं, जिसमें से कांगड़ा जिला में केवल एक है। हालांकि इस बार के चुनाव से पहले वह लोगों के बीच कम ही दिखे थे। उनका सामना अब शांता के साथ साथ मोदी लहर से भी है। आम आदमी पार्टी के राजन सुशांत अपनी जीत से ज्यादा शांता कुमार की हार के लिए मेहनत कर रहे हैं। उनके निशाने पर चंद्र के बजाय शांता कुमार ही रहे हैं। सुशांत जानते हैं कि शांता के वोट खराब कर ही वह खुद की संभावनाएं बना सकते हैं।
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क्या हुआ था पिछले चुनाव में?
2009 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजन सुशांत 20779 वोट के अंतर से ये सीट जीते थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र कुमार को हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस को केवल चंबा सदर, ज्वाली, कांगड़ा, नगरोटा बगवां, पालमपुर और धर्मशाला में लीड मिली थी। अन्य सभी चुनाव क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिली थी।
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नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी
कांगड़ा सीट पर प्रचार की लड़ाई नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी मानी जा सकती है। यहां नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पालमपुर में रैली की तो राहुल गांधी ने कुछ समय पहले धर्मशाला में चुनावी रैली की थी। हालांकि कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भाजपा की ओर से शांता के लिए धूमल ने भी प्रचार किया।

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