
बिलासपुर। बरसात का मौसम शुरू होते ही स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के दावों की कलई खुलने लगी है। गत मंगलवार दोपहर बाद हुई मूसलाधार बारिश के बाद शाम तथा उसके बाद बुधवार सुबह बिलासपुर शहर व साथ लगते कुछ गांवों में मटमैले पानी की आपूर्ति हुई। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण कई लोगों को दूषित पानी ही प्रयोग करना पड़ा। इससे जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता।
कई दिनों के सूखे के बाद बिलासपुर जिले में अब आसमान से पानी बरसने लगा है। पहले गत सोमवार रात और उसके बाद मंगलवार दोपहर बाद के समय मूसलाधार बारिश हुई। इससे सड़कें भी नालाें की तरह नजर आई। इस बारिश का असर पेयजल योजनाआें, विशेष रूप से ग्रेविटी स्कीमों पर पड़ा। पेयजल स्रोतों में घुसा बरसात का पानी आईपीएच के जल भंडारण टैंकों में पहुंच गया। इसके चलते शहर के रौड़ा सेक्टर के कुछ हिस्सों तथा साथ लगते दनोह व कोसरियां गांवों में गत मंगलवार शाम व बुधवार सुबह नलों में मटमैला पानी आया।
विनोद कुमार, अंशुल, देवीराम, सोहनलाल, रामलाल शर्मा, रामपाल, रूपलाल व संजीव कुमार आदि ने बताया कि नलों में आया मटमैला पानी किसी भी लिहाज से प्रयोग करने लायक नहीं था। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण कई लोगों को मजबूरन इसी पानी को छानकर प्रयोग करना पड़ा। बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा रहता है। ऐसे में दूषित पानी के सेवन से जलजनित रोग पनपने की आशंका भी बन गई है। आईपीएच के सहायक अभियंता सुखराम चौधरी ने कहा कि कुछ ग्रेविटी स्कीम में ऐसा हुआ है। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि योजना के स्रोतों में बारिश का पानी आने पर उसे टैंकों में न डाला जाए।
