कहीं टूट न जाए धैर्य का बांध

बिलासपुर। एसएसबी ग्रामीण बेरोजगार प्रशिक्षित (गुरिल्ला) संघ ने इस वर्ग की मांगें पूरी न होने पर गहरा रोष जताया है। संगठन का कहना है कि प्रशिक्षित गुरिल्ला लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी लगातार अनदेखी कर रही है। ऐसा न हो कि उनके धैर्य का बांध टूट जाए। बेहतर होगा कि सरकार समय रहते उनकी जायज मांगों को पूरा करे।
मंगलवार को गुरिल्ला संगठन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष टेक चंद गुलेरिया की अध्यक्षता में लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में कहा गया कि एसएसबी के गुरिल्ला वर्ष 1964 से देश की एकता व अखंडता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनकी कद्र करने के बजाए सरकार ने उनके प्रति यूज़ एंड थ्रो की नीति ही अपनाई है। आलम यह है कि उनके परिवारों के सामने भूखों मरने की नौबत पैदा हो गई है। इससे उनमें नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
बैठक में कहा गया कि गुरिल्लों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। सरकार की बेरुखी ऐसी ही रही तो अपना हक हासिल करने के लिए वे कोई भी हद पार करने से गुरेज नहीं करेंगे। बेहतर होगा कि सरकार समय रहते उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाए। बैठक में संगठन के जिला अध्यक्ष प्यारेलाल व सचिव श्याम सिंह नेवार के साथ ही प्रेम भड़ोल, राजकुमारी, सुरेश भड़ोल, नरोत्तम सांख्यान, गरजाराम, सहजराम, रामपाल, नरेश, होशियार सिंह, नसीब लाल, रीता, हरदेई, रत्नी देवी, भगतराम, जगतराम, संजय, रोशन, कमला, शंकर, सुंदरराम, तुलसी, मुंशीराम, छांगुराम व महंत राम आदि ने भाग लिया।

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