
रामपुर बुशहर। क्षेत्र चल रहे निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाला बायोवेस्ट कहां फेंका जा रहा है, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। यहां चल रहे किसी भी अस्पताल के पास अपना बायोवेस्ट प्लांट नहीं है, लेकिन हैरत की बात तो यह है कि रामपुर में तैनात प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी तक नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि बायोवेस्ट प्लांट की डील शिमला कार्यालय से होती है। अब सवाल उठाता है कि अगर अधिकारी शिमला से डील करेंगे तो यहां बैठे प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का क्या काम है? अस्पतालों से निकलने वाला बायोवेस्ट यहां,वहां फेंका जा रहा है, जबकि नियम के अनुसार बायोवेस्ट के लिए हर अस्पताल के पास अपना प्लांट होना जरूरी है। जहां अस्पताल से निकलने वाले कचरे को नष्ट किया जा सके, लेकिन रामपुर में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।
बाक्स
ये बीमारियां फैलने का खतरा
जानकारों की मानें तो खुले में बायोवेस्ट फेंकने या इसे जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है। इससे क्षेत्र में बीमारी फैल सकती है। वहीं, अगर इसे पशु आदि खा ले तो उनकी मौत हो जाएगी। वहीं, बरसात के पानी में मिल कर अगर इसका रसायन पानी के स्रोत में पहुंचा जाए तो क्षेत्र जलजनित रोगों की चपेट में आ सकता है। ऐसे पानी के सेवन से किसी की मौत भी हो सकती है। हालांकि सोमवार को सांसद के दौरे के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने इस मुद्दे को सांसद के सामने भी उठाया था।
बाक्स..
क्या कहते है अधिकारी
रामपुर कार्यालय में तैनात प्रदूूषण नियत्रंण बोर्ड के एक्सईएन अजीत नेगी का कहना है कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है कि कितने अस्पतालों के पास अपने मेडिकल बायोवेस्ट प्लांट हैं। उन्होंने कहा कि इसकी डील शिमला से की जाती है।
