
शिलाई (सिरमौर)। कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास शिलाई की वार्डन को अनियमितताओं के चलते वार्डन पद से हटा दिया गया है। वह अब केवल विद्यालय में बतौर अध्यापिका का कार्य करेंगे। उनके स्थान पर विद्यालय की एक अन्य अध्यापिका को हॉस्टल वार्डन का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है। छात्रावास की सभी छात्राएं शिलाई वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती हैं जो छात्रावास से अटैच है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित हिमाचल प्रदेश सर्व शिक्षा अभियान की देखरेख में चल रहे इस छात्रावास में बीपीएल, ओबीसी, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की 50 छात्राएं रहती हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास शिलाई की वार्डन पर पिछले कई दिनों से अनियमितताओं की शिकायतें आ रही थीं। 19 नवंबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिल्ली की टीम ने छात्रावास का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वहां रह रही छात्राओं को तीन दिनों से दोपहर का भोजन नहीं मिल रहा था। इसके अतिरिक्त अन्य कई कमियां पाई गई थीं। मंत्रालय के टीम ने सारे मामले की रिपोर्ट एवं मौके पर लिए गए छात्राओं के बयान की रिपोर्ट प्रदेश के सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना अधिकारी को उक्त वार्डन के विरुद्ध कार्रवाई करने को लिखा था। प्रदेश के राज्य परियोजना अधिकारी डीसी राणा ने तत्काल प्रभाव से जिला परियोजना अधिकारी नाहन को आदेश जारी कर वार्डन को पद से मुक्त करने के आदेश जारी कर दिए थे।
सोमवार को जिला परियोजना अधिकारी नाहन ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिलाई के प्रधानाचार्य को आदेश जारी किए। प्रधानाचार्य दीपचंद ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उक्त छात्रावास वार्डन का चार्ज एक अन्य अध्यापिका को सौंपा जा रहा हैं। छात्रावास की छात्राएं इसी स्कूल में पड़ती हैं।
