कर्मचारी गुटों में छिड़ी वर्चस्व की जंग

बिलासपुर। कर्मचारी संगठनों के दो गुटों की आपसी तकरार अब वर्चस्व की जंग तक पहुंच गई है। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के चुनाव के बाद एक और समानांतर कार्यकारिणी का गठन हुआ है। दोनों ही संगठनों में अब जेसीसी की बैठक के निमंत्रण के लिए जोर आजमाइश चल रही है। ऐसे में अब प्रशासन भी असमंजस की स्थिति में है। किसे बुलाएं और किसे नहीं ? इस पर अटकलों का दौर जारी है। हालांकि दोनों की संगठनों (मराठा एवं चड्ढा गुट) ने जेसीसी की बैठक को जल्द कराने के लिए उपायुक्त से मुलाकात भी की है।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के चुनावों के दौरान यहां संयुक्त समिति का गठन करते हुए एका के प्रयास किए गए थे। कई स्थानों पर सर्वसहमति भी बनी। लेकिन बाद में समानांतर संगठन खडे़ होने से एका की उम्मीदें धराशाही हो गई। बिलासपुर में अनिल चड्डा की अगुवाई वाले संगठन को चुनाव में जीत मिली। फिर कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसके कुछ ही दिन बाद कृपाल मराठा के नेतृत्व में अपनी अलग कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसी महीने अनिल चड्ढा की अगुवाई वाले संगठन ने उपायुक्त से मिलकर न केवल जेसीसी की बैठक के लिए आमंत्रण मांगा बल्कि कर्मचारियों से संबंधित कई मांगे भी उपायुक्त के सामने उठाई। इससे कुछ ही दिन बाद मराठा गुट की अगुवाई वाले संगठन ने भी उपायुक्त से मुलाकात कर जल्द से जल्द जेसीसी की बैठक बुलाने का आग्रह किया। ऐसे में अब दोनों कर्मचारी संगठनों के बीच वर्चस्व के लिए छिड़ी जंग में किसे आमंत्रण मिलेगा। इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। दोनों ही संगठन जेसीसी की बैठक में अपना-अपना दावा जता चुके हैं। बहरहाल, दोनों गुटों के जेसीसी बैठक जल्द बुलाने की मांग के बाद प्रशासन भी असमंजस की स्थिति में है। किसे बुलाएं और किसे नहीं। ऐसे में जेसीसी की बैठक लटकती नजर आ रही है। इस बारे में अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।

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