
उत्तरकाशी। मोरी प्रखंड के देवरा गांव में धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर लौटे कंडार देवता का यहां भव्य स्वागत किया गया। पहली बार इस जात्रा पर गए कंडार देवता मार्ग में पड़ने वाले गांवों में बाड़ाहाट क्षेत्र से ब्याही गई ध्याणियों को आशीर्वाद देते हुए लौटे।
कर्ण महाराज की धरती सिंगतूर पट्टी के देवरा गांव में धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर कंडार देवता लौट आए। वापसी में कर्ण महाराज के पुत्र विशासन की डोली ने कंडार देवता को खरसाड़ी गांव तक विदा किया। करीब सौ किमी पैदल यात्रा के इस पथ पर पड़ने वाले मोरी, नैटवाड, खरसाडी, गुंदियाटगांव, गैर, धराली, डख्याटगांव, गंगनाणी, सिंगोट, नाकुरी, मातली, बड़ेथी गांवों में देवता का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान कंडार देवता ने इन गांवों में बाड़ाहाट क्षेत्र से ब्याही गई ध्याणियों को आशीर्वाद देने के साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान बताया।
मणिकर्णिका घाट पर स्नान और पूजा-अर्चना के बाद देवता की डोली भैरवचौक स्थित कंडार देवता के मंदिर में अल्प विश्राम के बाद संग्राली गांव स्थित अपने प्राचीन मंदिर में लौट गए। जिला मुख्यालय पर पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा, भूपेंद्र चौहान, विजय चौहान, वीरेंद्र डंगवाल, अरविंद उनियाल, रवींद्र जोशी, राकेश, सुखशर्मानंद, विनोद नेगी, नत्थी सिंह, सत्यानारायण पुरी आदि ने देवता का स्वागत किया।
