
कर्णप्रयाग। ‘हो बदरी बाबुल के आंगन जाइओ, बरसियो कहियूं बिटियां की आखियां और का लेके जाइवा, गवना ओ रामा..’ गायिका सुषमा बाजपेयी के इन गीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया।
शुक्रवार को नए बस अड्डे पर आयोजित बदरी-केदार महोत्सव का शुभारंभ महामृत्युंजय कला मंच नारायणबगड़ के कलाकारों की श्रीनंदा राजजात प्रस्तुति से हुआ। मां नंदा के मायके से ससुराल विदाई को कलाकारों ने इस अंदाज में पेश किया कि दर्शकों की आंखें नम हो गई। वहीं मानस कला मंच पिथौरागढ़ के कलाकारों का रक्तबीज नाटिका का शानदार मंचन किया। सामूहिक नृत्य प्रस्तुति मेरु प्यारु पहाड़ ने खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बुंदेलखंड के सेरिया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सेरा और राई नृत्य रहा।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री अमृता रावत और गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने किया। गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने कहा कि इस तरह के आयोजन से गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा को भी बल मिलेगा। केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से गढ़वाली-कुमाऊंनी एकेडमी खोली जाएगी। साथ ही गढ़वाली बोली के चैनल को लेकर भी वार्ता चल रही है। इस मौके पर डिप्टी स्पीकर डा. एपी मैखुरी, संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट, लोक गायक अनिल बिष्ट, फिल्म अभिनेता बलराज नेगी सहित कई मौजूद थे। संचालन हेमंत बिष्ट ने किया।
