कभी हमारे लिए धड़कता था इनका दिल

अल्मोड़ा। शहर में आम लोगों और राहगीरों को समय बताने के लिए प्राचीन इमारतों में लगी घड़ियों का समय थम गया है। चौघानपाटा में स्थित लेफ्टिनेंट कर्नल सतीश चंद्र जोशी पार्क में क्लॉक टावर और मालरोड के समीप प्राचीन बद्रेश्वर मंदिर में लगी घड़ियां देखरेख के अभाव में पिछले काफी समय से ठप पड़ी हैं, लेकिन इन ऐतिहासिक धरोहरों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
स्वतंत्रता से पहले और बाद के दशकों में हाथ की घड़ियों का चलन काफी कम था। उस जमाने में समय देखने के लिए अन्य साधन भी नहीं थे। ऐसे में पार्कों, मंदिरों, चर्चों और अन्य सार्वजनिक भवनों में घड़ियां लगाई जाती थीं। इन सार्वजनिक भवनों में लगी घड़ियों से ही वहां से गुजरने वाले लोग और राहगीर समय देखा करते थे। घड़ियों की खासियत यह थी कि एक बार चॉबी भरने के बाद सप्ताहभर तक चलती थीं। इन घड़ियों में हर आधे घंटे में घंटी भी बजती थी।
अल्मोड़ा में चौघानपाटा स्थित ले. जनरल सतीश चंद्र जोशी पार्क में विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के संस्थापक निदेशक रहे कृषि वैज्ञानिक बोसी सेन की स्मृति में क्लॉक टावर का निर्मित है और उसमें घड़ी लगी है, ताकि यहां से आने जाने वाले राहगीरों को समय देखने में सुविधा हो। टावर में भीतर से चढ़ने के लिए सीढ़ियां भी हैं। जिससे टावर में चढ़कर घड़ी में चॉबी भरी जाती है। यह पार्क पालिका के अधीन है परंतु पिछले काफी समय से यह घड़ी खराब पड़ी है।
इसके अलावा राय बहादुर बद्री दत्त जोशी (दन्यां) ने 1886 में मालरोड के निकट प्राचीन बद्रेश्वर मंदिर में एक घड़ी लगवाई थी। यह घड़ी भी वर्षों से ठप है। जनप्रतिनिधि और अधिकारी यहां से गुजरते हैं लेकिन कोई इस ओर ध्यान नहीं देता। महिला अस्पताल की भी प्राचीन घड़ी खराब पड़ी है। इधर पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोेशी का कहना है कि घड़ी साज नहीं मिलने से यह प्राचीन घड़ियां ठीक नहीं की जा सकी हैं। घड़ीसाज मिलने पर खराब घड़ियां ठीक करवाई जाएंगी।

Related posts