
उत्तरकाशी। जिले में मौसम बार-बार खराब हो रहा है। ऐसे में अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में हेलीकाप्टरों से रसद आपूर्ति का कार्य प्रभावित हो रहा है। हेलीकाप्टर से एक बार में महज दो-तीन कुंतल सामान ले जाने की स्थिति है। ऐसे में ढोए जा रहे सामान से कई गुना ज्यादा लागत ढुलान पर खर्च हो रही है। बाढ़ के बीस दिन बाद भी उत्तरकाशी से आगे सड़क मार्ग चालू नहीं किया जा सका है। ऐसे में हेलीकाप्टरों पर निर्भर रसद आपूर्ति कब तक क्षेत्र की जनता का पेट भर पाएगी, कहना मुश्किल है।
गंगोत्री की ओर फंसे हुए यात्रियों को निकालने के बाद सेना के एक और प्राइवेट कंपनियों के दो हेलीकाप्टर चिन्यालीसौड़ और मातली से दूरस्थ क्षेत्रों तक रसद पहुंचाने में जुटे हैं। इसमें निजी कंपनी के हेलीकाप्टर ही ज्यादा उड़ते दिख रहे हैं।
यात्री ढोने वाले इन हेलीकाप्टरों से एक बार में महज दो से तीन कुंतल सामान ही ढोया जा सकता है। चार धाम यात्रा में ये हेलीकाप्टर 70 से 80 हजार रुपये प्रति घंटा किराया वसूलते हैं। इससे यह तो साफ है कि रसद की कीमत से कई गुना ज्यादा खर्चा ढुलान पर ही आ रहा है। देखना है कि सड़क एवं संपर्क मार्गों को बहाल किए बिना यह महंगी व्यवस्था कब तक चलेगी।
अब तक पहुंचाया गया सामान
हेलीकाप्टरों से हर्षिल, भटवाड़ी, मनेरी, डिडसारी, गजोली, मल्ला, स्याबा, सौरा, लिवाड़ी व फिताड़ी में राशन उतारा जा रहा है। प्रशासन की मानें तो अब तक इन जगहों पर 293 कुंतल राशन, 28 गैलन कैरोसीन, 461 सोलर लालटेन और 47 पेटी दवाइयां पहुंचाई गईं।
कोट-
आपदा के बीस दिन बाद भी ध्वस्त सड़कों को बहाल करने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। हेलीकाप्टर की महंगी व्यवस्था ज्यादा लंबी चलने वाली नहीं। ग्रामीण सिर्फ गांवों तक के रास्ते बहाल करने की मांग कर रहे हैं।- गोपाल रावत, पूर्व विधायक गंगोत्री।
