
कोकसर (लाहौल-स्पीति)। चंद्रावैली के गौंधला पंचायत के गांव यांगलावासियाें के पच्चीस 25 वर्ष बाद भी सड़क-पुल बनने की सपने पूरे नहीं हो सके हैं। आज भी इस गांव के ग्रामीणों को अपने नकदी उत्पाद अपनी तथा घोड़ों की पीठ पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाने पड़ते हैं। हालांकि, यांगला के लिए छह किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के लिए वर्ष 1989 में धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद महज तीन किलोमीटर से आगे सड़क नहीं बन पाई है। जबकि, वर्ष 2001 में पुल निर्माण के लिए 126.50 लाख की धनाराशि स्वीकृत होने के बावजूद आज दिन तक पुल निर्माण का कार्य अधर में लटक गया है। यांगला गांव के प्रदीप कुमार मालपा, सुदर्शन, सिकंदर, रंजीत राजन, विजय कुमार, ओम, राजेश और पूनम ने बताया कि आजादी के 66 साल बाद भी यांगला के लोग सड़क और पुल के लिए महज सपना संजो रहे हैं। मालपा ने बताया कि वर्ष 2010 में यांगला पुल निर्माण कार्य केे लिए नाबार्ड केे तहत 319.33 लाख रुपये की राशि स्वीकृ त होने के बाद टेंडर करवा दिए लेकिन आज दिन तक पुल निर्माण का कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया है। उन्होंने बताया कि अब यांगला के ग्रामीण जल्द गांव स्तर पर संघर्ष समिति का गठन करेंगे। उधर, लोनिवि के अधिशाषी अभियंता गुमान सिंह नेगी ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस आड़े आ रही है।
