
धर्मशाला। …अब आपका सफर 500 मीटर का हो या फिर पांच किलोमीटर का। कंडक्टर ‘साहब’ आपसे पांच रुपये ही लेंगे। कचहरी अड्डा से अस्पताल तक जाना हो या फिर पोस्ट ऑफिस तक। सिक्का पांच का ही चलेगा। लोकल रूट पर रोजाना सफर करने वालों को अब तीन रुपये अतिरिक्त के हिसाब से 180 रुपये की चपत प्रतिमाह लगेगी।
पहली अक्तूबर से एचआरटीसी और निजी बसों में लोकल स्टेशनों में सफर करने पर पांच रुपये न्यूनतम किराया निर्धारित किया गया है। पहले लोकल स्टेशन पर बसाें में दो रुपये अदा कर काम चल जाता था। लेकिन अब किराये में तीन रुपये और इजाफा होने से सवारियों को सफर करना महंगा साबित होगा। ‘अमर उजाला’ ने जब परिवहन निगम के इस फैसले पर लोगों की राय जाननी चाही तो लोग काफी निराश दिखे। वहीं, हर रोज लोकल स्टेशनों में आने-जाने वाले लोगों में किराये को लेकर चरचाओं का माहौल गरमाया रहा। कुछेक लोग ज्यादा किराया अदा करने को हामी नहीं भर रहे थे। इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारी वर्ग को होगी। किराये में बढ़ोतरी होने पर अब परिचालक और सवारियों के बीच नोकझोंक होने की आशंका भी जताई जा रही है।
व्यापार मंडल के प्रधान रविकांत शर्मा ने बताया कि सरकार ने एकदम लोकल स्टेशनों का किराया तीन रुपये बढ़ा दिया है। इससे सवारियों को सफर करना महंगा साबित होगा। सरकार को अधिकतम एक रुपये लोकल स्टेशनों का बढ़ाना चाहिए। उधर, राजीव कुमार निवासी कोतवाली ने बताया कि लोकल स्टेशनाें में सवारियां ज्यादा सफर करती हैं। इस कारण सरकार ने किराया बढ़ाकर अच्छा नहीं किया है। संजीव कुमार निवासी चैतडू़ का कहना है कि किराया बढ़ने से व्यापारी वर्ग को काफी नुकसान होगा। चूंकि व्यापारी लोकल स्टेशनों में सामान के लिए ज्यादा सफर करते हैं। अजय कुमार निवासी धर्मशाला का कहना है कि पहले तो सरकार ने प्रति किलोमीटर 33 पैसे किराया बढ़ा दिया। अब लोकल स्टेशनों का 5 रुपये किराया कर दिया है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।
