
बरोट (मंडी)। उत्तराखंड और किन्नौर जिले में प्राकृतिक आपदा से बरपी तबाही का मंजर लोगाें को भयभीत किए हुए है। अब उन स्थानों में भी लोग सहमे हुए हैं, जहां पहले बाढ़ जैसी स्थिति बन चुकी है या फिर बनने के आसार हैं। मंडी जिले में बरोट स्थित ऊहल नदी के साथ बसे परिवारों को बरसात में यही खतरा सता रहा है। कई बार ऊहल नदी अपना रौद्र रूप धारण कर कहर बरपा चुकी है। उत्तराखंड और किन्नौर में हुई त्रासदी के बाद लोगाें के जहन में ऊहल का खौफनाक रूप फिर जीवंत हो उठा है। 18 सितंबर 2012 को ऊहल नदी में भयंकर बाढ़ आ चुकी है। बाढ़ के पानी तथा सिल्ट एवं मिट्टी से 40 दुकानों, 15 घरों तथा पीएचसी भवन सहित करोड़ों की संपत्ति को नुकसान हुआ था। जानी नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन इस त्रासदी में लोगाें को रात को ही घर छोड़कर अन्य सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेकर जान बचानी पड़ी थी।
बाढ़ से प्रभावित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरोट की हालत अभी तक नहीं सुधर सकी है। बाढ़ से पीएचसी का भवन मलबे में पूरी तरह दब गया था। इसके अलावा पंजाब राज्य बिजली बोर्ड शानन के बरोट स्थित गेटों को भी क्षति हुई थी। लेकिन, पंजाब बिजली बोर्ड शानन प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने नदी के किनारो पर क्रेट वॉल लगाने की जहमत नहीं उठाई है। न ही पंजाब सरकार और न ही प्रदेश सरकार इस ओर ध्यान दे रही है।
इससे पहले वर्ष 1995 में भी ऊहल नदी में भयंकर बाढ़ आने से स्थिति बिगड़ गई थी। यदि ऊहल नदी में बाढ़ आती है तो इसकी चपेट में बरोट से मुलथान बाजार तक का एरिया होगा। जिसमें कई घर, दुकानें और सरकारी भवन तबाही की चपेट में आएंगे। इधर, बरोट सब डिवीजन शानन के एसडीओ प्रेम पाल का कहना है कि विभाग इसकी रिपोर्ट जल्द उच्चाधिकारियों को भेजेगा। वहीं, स्थानीय विधायक एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह का कहना है कि अधिकारियों को खतरे एवं सुरक्षा के दृष्टिगत सर्वे करने के आदेश दिए हैं।
