
नयनादेवी (बिलासपुर)। प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी में अपनी सेवाएं देने वाले पुजारी वर्ग को मिलने वाली हिस्सेदारी में बदलाव से कई पुजारियों में भारी नाराजगी है। हाल ही में वितरित तीन महीने की हिस्सेदारी की राशि में प्रशासन ने कथित तौर पर बदलाव किया है। कई परिवारों को एक-एक हजार तो कइयों के हिस्से लाखों की रकम आई है। उधर, प्रशासन का तर्क है कि राजस्व रिकार्ड के आधार पर ही हिस्सेदारी दी गई है।
पुजारी वर्ग का कहना है कि 27 साल से जो हिस्सेदारी उन्हें मिल रही थी, उसमें सरकार ने भारी बदलाव कर लगभग 150 परिवारों के भविष्य का तहस-नहस कर दिया है। वर्ष 1985 में जब मंदिर न्यास का गठन हुआ तो सरकार ने पुराने फैसलों पर बदलाव करते हुए नई व्यवस्था की। पुजारियों एवं हिस्सेदारों को बराबर हिस्सा देना शुरू कर दिया। सभी ने उस दौरान इस फैसले का सराहा था। अब न जाने किस आधार पर इस व्यवस्था में फेरबदल किया गया है। इस बार अप्रैल, मई और जून की मिलने वाली राशि देने की बारी आई तो पुराने तमाम आदेशों को रद कर बदलाव किया गया। कुछ परिवारों को महज 1100 रुपये मिले। कुछ को परिवारों को लाखों की रकम। कुछ परिवारों के दस तो कुछ के हिस्सेे एक से तीन लाख रुपये आए हैं। उधर, उपायुक्त डा. अजय शर्मा ने संपर्क करने पर बताया कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार आवंटन किया गया है। जैसा रिकार्ड में है, उसी के आधार पर सभी को हिस्सेदारी मिली है। प्रदेश के अन्य बड़े मंदिरोें में भी यही व्यवस्था है।
