
मंडी। जिला उपभोक्ता फोरम ने नए मॉडल की जगह पुराने माडल का वाहन बेचने पर वाहन विक्रेता और वाहन निर्माता कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में 7,55,000 रुपये ब्याज समेत अदा करने के आदेश दिए। इसके अलावा उपभोक्ता को पहुंची मानसिक यंत्रणा के बदले 1,00,000 रुपये तथा शिकायत व्यय के तौर पर 5000 रुपये भी अदा करने के आदेश दिए।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जेएन यादव और सदस्य रमा वर्मा एवं लाल सिंह ने चच्योट तहसील के चैलचौक निवासी राकेश कुमार पुत्र हरी सिंह की शिकायत को सही मानते हुए वाहन निर्माता कंपनी को उक्त राशि की अदायगी संयुक्त रूप से 12 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने का फैसला सुनाया। उपभोक्ता को राशि प्राप्त होने के बाद 10 दिनों के भीतर वाहन को विक्रेता के सुपुर्द करना होगा। अधिवक्ता समीर कश्यप के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने कंपनी और उसके विक्रेता से 2010 मॉडल वाहन खरीदा था, लेकिन वाहन खरीदने के एक सप्ताह में ही इसके रिवर्स गियर में खराबी आ गई। उपभोक्ता ने वाहन को मरम्मत के लिए विक्रेता के पास पहुंचाया, लेकिन विक्रेता ने पूरा गियर बाक्स बदलने की बजाय एक ही गियर बदला। इसके कुछ समय बाद स्टीयरिंग में खराबी आने पर विक्रेता ने स्टीयरिंग को बदल दिया। इसके बाद कई बार वाहन खराब होता रहा। उपभोक्ता को हर बार वारंटी अवधि होने के बावजूद मरम्मत करने के लिए राशि खर्च पड़ी। ऐसे में उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दायर की थी। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि उपभोक्ता की ओर से विशेषज्ञ इंजीनियर एलआर शर्मा की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें जाहिर किया गया था कि वाहन को वारंटी अवधि में ही 20 बार मरम्मत करवाना पड़ा है। विशेषज्ञ का मानना था कि वाहन के इंजन सहित कई पुर्जे 2009 में निर्मित थे। सूचना के आधार पर मांगी सूचना में क्षेत्रीय वाहन कार्यालय का कहना था कि वाहन 2008 का मॉडल है। ऐसे में फोरम ने विक्रेता और निर्माता के खिलाफ फैसला सुनाया।
